लखनऊ। भाजपा के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा बृहस्पतिवार को अचानक बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। यहां पर व्याप्त अव्यवस्था को देख कर बेहद नाराज हुए। आनन-फानन में पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व अधीक्षक को फटकार लगायी। राज्य मंत्री अस्पताल अपने रिश्तेदार को देखने के लिए पहुंचे थे। बताया जाता है कि भाजपा के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा दोपहर दो बजकर चालीस मिनट के आस-पास अस्पताल के सुपर स्पेशिएलिटी ब्लाक पहुंचे तो उन्हें गेट पर कोई गार्ड तैनात नहीं मिला। मुख्य दरवाजा अंदर से बंद करके गार्ड नीचे गप्पे लड़ा रहे हैं। उन्होंने देखा कि डॉक्टर आराम फरमा रहे हैं। परिसर में चारों तरफ के गेट बंद हैं। नाराजगी प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि प्राइवेट लिमिटेड बनाया हुआ है।
यहां पर अपनी मौसी शकीला बानो (80) का हालचाल लेने पहुंचे थे। उनको काफी तलाश के बाद अपनी मौसी का बेड नम्बर पता चल सका। उन्होंनेआक्रोणश प्रकट करते हुए कहा कि मैं तो राज्यमंत्री हूं, आम आदमी को अपने मरीज को ढूंढने में कितनी दिक्कत होती है। उन्होंने परामर्श दिया कि बलरामपुर अस्पताल में भी पीजीआई की तर्ज पर जनसम्पर्क अधिकारी की जरूरत है।
बताते है कि अस्पताल पहंुचने पर उनके सुरक्षा गार्ड पहले एसएस ब्लाक के गेट खुलवाने की जद्दोजहद में लगे रहे। फिर जैसे ही उन्होंने इस ब्लाक में प्रवेश किया तो सामने डॉक्टर का रूम था। जहां एक जूनियर डॉक्टर ही मौजूद था। उससे यह पूछे जाने पर कि मरीज शकीला बानों कहां भर्ती है,ं जिनका डायलेसिस होना है, तो जूनियर डॉक्टर कोई भी जानकारी नहीं दे पाये। जिसपर राज्यमंत्री ने जूनियर डॉक्टर ने कहा की इस ब्लाक के जिम्मेदार डॉक्टर की जानकारी ली लेकिन उनका भी कुछ पता नहीं चला। इसपर राज्यमंत्री ने नाराजगी जताई और यहां की फैली अव्यवस्था पर चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखने की बात कही।
ब्लाक की एक सिस्टर ने किसी तरह राज्यमंत्री को भर्ती मरीज के बेड तक पहुंचाया। वहां भी गेट बंद देख राज्यमंत्री ने कहा कि चारों तरफ के गेट बंद हैं। उन्होंने निदेशक को बुलाने पर पता चला कि निदेशक डॉ. राजीव लोचन छुट्टी पर हैं। उनकी जगह अधीक्षक डॉ. हिमांशु और सीएमएस डॉ. ऋषि सक्सेना मौके पर पहुंचे। राज्यमंत्री ने कड़े शब्दों में उनकी फटकार लगायी। मुझे अपने मरीज तक पहुंचने में कितनी दिक्कत हुई तो आम आदमी का क्या हाल होता होगा। इसपर अधीक्षक और सीएमएस उनसे आगे से व्यवस्था को ठीक करने की बात कहते रहे।
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