न्यूज डेस्क। डब्ल्यूएचओ आयुर्वेद, पंचकर्म और यूनानी पद्धति से होने वाली पारंपरिक इलाज के लिये मानक तय करने की कोशिश शुरू कर दी है। इसमें स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य विश्वस्तर पर सभी को सुरक्षित और प्रभावी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली मुहैया कराना है। मानक तय करने के दस्तावेजों को तैयार करना स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय के बीच हुये परियोजना सहयोग समझौता (पीसीए) में शामिल है। इन दस्तावेजों के मसौदे की 18 देश के कुल 39 विशेषज्ञ समीक्षा करेंगे। इन विशेषज्ञों में 13 आयुर्वेद के, 13 पंचकर्म के और 13 यूनानी पद्धति के हैं।
ऐसे तीन दस्तावेजों के लिए 17 से 19 सितंबर तक जयपुर में डब्ल्यूएचओ कार्यकारी समूह की बैठक का आयोजन हो रहा है। तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय ने और संयोजन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर ने किया है। इस अवसर पर डब्ल्यूएचओ के पारंपरिक औषधि विभाग में क्षेाीय सलाहकार डॉ. सुंग्चोल किम ने सभी विशेषज्ञों का स्वागत किया और वित्तीय एवं लॉजिस्टिक मदद के लिए आयुष मंाालय का धन्यवाद दिया। उन्होंने व्यावहारिक चिकित्सा व्यवस्था में पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था के एकीकरण की जरूरत पर जोर दिया।उन्होंने डब्ल्यूएचओ से भारत के लिए एक विशेष मॉड्यूल और एम-योगा एवं एम-आयुर्वेद इत्यादि जैसे कार्यक्रम आधारित एप्लीकेशन विकसित करने में आयुष मंाालय की मदद करने का आग्रह किया।
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