लखनऊ। यदि ईमानदारी से सरकारी योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचा दिया जाये तो न कोई भूखा रहेगा और न ही कोई बच्चा कुपोषित होगा। यह बात मु यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साइंटिफिक कन्वेंशन सेण्टर में पोषण अभियान तथा सुपोषण स्वास्थ्य मेले के शुभार भ अवसर पर पर कही। इस मौके उन्होंने बस्ती जनपद के एक प्राइमरी स्कूल का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के प्रधानाध्यापक द्वारा स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही इसका आधुनिकीकरण भी किया गया है। इसके परिणामस्वरूप इस विद्यालय का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि यह एक उदाहरण है कि जो मानवीय संवेदना के साथ काम करेगा तो उसके परिणाम भी सकारात्मक आयेंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है और देश की कुल आबादी की 17 प्रतिशत आबादी यहां निवास करती है। बड़ा प्रदेश होने के कारण हमारे सामने चुनौतियां भी अधिक हैं लेकिन जब हम टीम वर्क से काम करते हैं तो चुनौतियों से लड़ने का बल भी मिलता है। मु यमंत्री जी ने कहा कि एक व्यक्ति की अच्छी सोच पूरी व्यवस्था की धुरी बदल सकती है। मु यमंत्री जी ने कहा कि जब वे सांसद थे, तब उन्हें कुशीनगर में भूख से हुई लोगों की मृत्यु पर काफी दु:ख हुआ था। इसीलिए जब वे मु यमंत्री बने तब उन्होंने राशन कार्डों का सत्यापन कराया तथा उन्हें आधार से लिंक कराया। अब तक 30 लाख से अधिक फर्जी राशन कार्ड प्राप्त हुएए जिन्हें निरस्त कराया गया। उन्होंने कहा कि राशन की दुकानों में ई-पॉस मशीन लगवायी। 13 हजार मशीन लगने के बाद करीब 350 करोड़ रुपए की बचत हुई। जब प्रदेश के सभी 80 हजार कोटे की दुकानों में मशीनें लग जाएंगी तो 2000 करोड़ रुपए की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राशन वितरण व्यवस्था में बीच के लोगों को अलग करने के लिए कार्य किया जा रहा हैए जिससे रुपए सीधे लाभार्थी के खाते में जाएं और वे अपनी इच्छानुसार खुले बाजार से कहीं से भी अनाज ले सके। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े बताते हैं कि तकनीक को अपनाकर ही भ्रष्टाचार पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। इस अवसर पर बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जैसवाल ने कहा कि कुपोषण से स बन्धित प्रदेश के आंकड़े भी पूरे भारत के आंकडों की तुलना में कमजोर हैं। उन्होंने कहा इसका एक प्रमुख कारण जन्म के बाद शुरुआती 2 वर्षों तक बच्चों का समुचित पोषण न होना है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का शुभार भ फीता काटकर किया।
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