लखनऊ। विशेषज्ञों का मानना है कि नाखूनों पर एक हफ्ते से ज्यादा देर के लिए नेल पॉलिश न लगा रहने दें। ज्यादा समय तक लगी रहने पर वह नाखूनों की सतह को खराब बना देती है। यही नहीं फटी त्वचा को कभी भी काटना व चबाना नहीं चाहिए। ऐसा करने से मुंह के बैक्टेरिया आपकी चोटिल त्वचा के संपर्क में आ सकते हैं। जो कि संक्रमण फैलाने में मददगार हो सकते है। इसी प्रकार सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा अस्पतालों में होता है, इस लिए अस्पताल प्रबंधन की चाहिए कि इसके रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाये।
अगर वह मरीज के समीप जाता है, उसे पहले और बाद में हाथ साबुन से जरूर धोना चाहिए। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैरामेडिकल साइंस डीन डा. विनोद जैन ने दी। वह केजीएमयू के कलाम सेंटर में केजीएमयू इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस की ओर से आयोजित ‘चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम विषयक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान डा. विनोद जैन ने बताया कि चिकित्सा संस्थानों को संक्रमण से बचाव के तरीके अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि रोगियों के संपर्क में आने के पहले और बाद में हाथ साबुन से जरूर धोएं। इसके अलावा सुरक्षा उपकरणों को पहनने से हटाने से पहले भी हाथ को साफ करना चाहिए। इस मौके पर विशेषज्ञों ने बताया कि बरसात का मौसम संक्रामक रोगों के फैलने का ातरा सबसे ज्यादा होता है। इससे बचने के लिए जरुरी है कि हमारे हाथों की सफाई क्योंकि हाथों से संक्रामक अधिक फैलता है। कार्यक्रम संयोजक डा अंकिता जौहरी ने बताया कि इस सतत प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन केजीएमयू की सीनियर फैकल्टी ने किया।
सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों को केजीएमयू पैरामेडिकल के वार्षिक समारोह में पुरस्कृत किया जायेगा। इस अवसर पर डा विनोद जैन और डा अंकिता जौहरी ने परिकल्पित एवं लिखित चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम पुस्तिका को इस विषय की सुलभ जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से सभी प्रतिभागियों को वितरित की गई। पुस्तिका में संक्रमण के बचाव व प्रबन्धन आदि का सचित्र विवरण है। कार्यक्रम के दौरान पैरामेडिकल साइंस के विद्यार्थियों ने भी व्या यान दिया। इस दौरान 20 विद्यार्थियों ने व्याख्यान दिया।
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