लखनऊ। अगर देखा जाए तो बच्चों में एनीमिया की दिक्कत बढ़ती जा रही है। इसका ठोस कारण भी पता नहीं लग पाता है। इस बीमारी में विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श लेकर इलाज व जांच करानी चाहिए। इस बीमारी में पर्याप्त लालरक्त कोशिकाएं नहीं होती हैं। यह बात किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बाल चिकित्सा एनीमिया बीमारी पर कार्यशाला में बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रश्मि कुमार ने कही। कार्यशाला में केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने कहा कि बीमारियों पर समय- समय पर गोष्ठियां व कार्यशाला के आयोजन से बीमारी की नयी जानकारियों से अपडेट हो जाते है।
उन्होंने कहा कि लाल रक्त कोशिकाएं ( आरबीसी) हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन का उपयोग करके पूरे शरीर में आक्सीजन ले जाती है। डा. रश्मि ने बताया कि इन कोशिकाओं या प्रोटीन में पर्याप्त मात्रा में नहीं हैै, तो एनीमिया होता हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभी, एनीमिया अस्थायी होता है और पोषण की कमी या ब्लड लॉस के कारण होता है। कई बार यह आनुवांशिक कारणों, ऑटोएम्यून समस्याओं, कैंसर और अन्य बीमारियों के कारण होती है।
जबकि कई प्रकार के एनीमिया का इलाज आसानी हो सकती हैं, कुछ प्रकार की एनीमिया बच्चों में गंभीर या जीवन को खतरे में डाल सकती हैं इस अवसर पर डॉॅ. नीतू निगम ने साइटोजेनिटक्स विधि के द्वारा बच्चों में पायी जाने वाली खून की बीमारियों के निदान (डायग्नोसिस) के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में एरा मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली मेहदी सहित डाक्टर मौजूद थे।
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