लखनऊ। अगर विशेषज्ञों की माने तो लिवर की बीमारी हेपेटाइटिस ‘बी ऐसी बीमारी है, जिसमें 90 प्रतिशत मरीजों को दवा की तत्काल आवश्यकता उम्र भर नहीं हो सकती है। फिर भी लोग विशेेषज्ञ डाक्टर के परामर्श के बगैर दवा का सेवन करते रहते है। पाजिटिव आने के बाद भी जांच करा कर ही विशेषज्ञों के परामर्श पर मात्र 10 प्रतिशत को ही दवा लेनी होती है। गलत इलाज व दवा के चलते ऐसे मरीज ड्रग रेजिस्टेंट से पीड़ित होते है आैर उनका लीवर खराब होने लगता है।
यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के गैस्ट्रो विभाग के विशेषज्ञ डा. सुमित रूंगटा ने दी।
उन्होंने बताया ज्यादातर लोग उनके पास इलाज कराने के लिए आते है, जिसमें जांच में हेपेटाइटिस पॉजिटिव होती है आैर लोग परेशान हो कर घबड़ा जाते हैं और लोगों के परामर्श या बिना विशेषज्ञ डाक्टर की परामर्श के बिना दवा का सेवन शुरू कर देते हैं, जबकि 90 प्रतिशत रोगी अपने इम्यून सिस्टम के मजबूत रहने के कारण बिना दवा के ही ठीक रहते हैं। वहीं कई मरीज बीमारी होने पर शर्तिया ठीक होने के दावे पर विभिन्न विद्या का इलाज भरोसा कर वह दवाएं सेवन करने लगते है, जिससे बीमारी आैर बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में ऐसे कई मरीज आते हैं जोकि दवा का सेवन कर रहे होते है।
डा. रूगंटा कहना है कि हेपेटाइटिस होने पर इसका इलाज विशेषज्ञ से ही कराना चाहिए। कई डॉक्टर हेपेटाइटिस का गलत इलाज कर मरीज को दवाएं लिख देते हैं जोकि मरीज के लिए आवश्यक नहीं होती है। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव आने पर मरीज की अन्य जांच की जाती है, उसके लीवर पर कितना असर पड़ रहा है इसी आधार पर दवा दी जाती है। बिना दवा के मरीजों को हर छह माह पर जांच कराते रहना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस पांच तरह की होती हैं, जिनके नाम हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई हैं। ये सभी बीमारियां संक्रामक होती हैं यानी एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकती हैं और इनमें से कुछ के कारण जान भी जा सकती है। इनमें से हेपेटाइटिस ए और ई पानी से पैदा होती है। वहीं हेपेटाइटिस बीए सी और डी सीरिंज, नीडल्स, इंजेक्शन, टूथब्राश व ब्लेड एक-दूसरे से शेयर करने पर फैलती हैं। जहां हेपेटाइटिस बी, सी और डी लीवर को नुकसान पहुंचाती है वहीं हेपेटाइटिस ए और ई से इस तरह का कोई खतरा नहीं होता है।
ऐसे बचें हेपेटाइटिस से –
- तेज धार वाले सामान जैसे नीडल्स, रेजर्स या टूथब्राश एक-दूसरे से शेयर न करें।
- गर्भवती महिलाओं को हेपेटाइटिस बी और सी की जांच करानी चाहिए।
- नवजात शिशुओं को पहले साल में हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना चाहिए।
- सभी को हेपेटाइटिस बी का टीका जरूर लगवाना चाहिए।
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