लखनऊ। प्रसव कराने में तकनीकी चूक के कारण अक्सर महिलाओं में बच्चेदानी बाहर आने की समस्या बन जाती है, जब कि कुछ महिलाओं में बच्चेदानी बाहर जन्मजात विकृति के कारण भी होती है। अभी तक इस प्रकार की दिक्कत को सर्जरी करके बच्चेदानी फिक्स कर देते थे, परन्तु लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करके बच्चेदानी को फिक्स करने की जानकारी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह जानकारी क्वीन मेरी अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो. उर्मिला सिंह ने दी।
प्रो. सिंह केजीएमयू के कलाम सेंटर में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ गायनोकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स के वार्षिक सम्मेलन में लखनऊ आब्स्टेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में सम्बोधित कर रही थी। कार्यशाला में अन्य स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टरों ने नयी तकनीक की जानकारी दी। शुक्रवार को महिलाओं में होनी वाली समस्याओं से जुड़े 40 केस को देश विदेशसे आए 40 गायनकोलॉजिस्ट ने केजीएमयू के सर्जिकलगैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के आपरेशन थियेटर में किया। यह सर्जरी लाइव केजीएमयू के कलाम सेंटर में कार्यशाल में डॉक्टर्सको दिखाई गयी। कार्यशाला का उद्घाटन केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी.भट्ट ने किया।
नयी तकनीक लेप्रोस्कोपी से गर्भाशय के ट्यूमर, रसोली के ऑपरेशन, हिस्ट्रोस्कोपी, गर्भाशय की जांच और मूत्रजनन आदि रोगों की लाइव सर्जरी की गयी। प्रो. उर्मिला ने बताया कि लाइव सर्जरी के दौरान युवती की बच्चेदानी का इंडोस्कोपी के माध्यम से ऑपरेशन कर उसको सही जगह पर फिक्स किया गया।युवती कि जन्म से ही बच्चेदानी बाहर थी जिसको अबसहि जगह पर बिना चीरा लगाए फिट कर दिया गया है।
डॉ. अंजू अग्रवाल ने बताया किहिस्ट्रोस्कोपी के माध्यम से औरतें के जननांगों की इंटरनल जांचो को किया जा सकता है।
कानपुर से आई डॉ. विनीता अवस्थी ने बताया कि क्षय रोग महिलाओं के अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय ग्रीवा को प्रभावित करता है। इसमें गर्भाशय टीबी बांझपन का प्रमुख कारण होता है। महिलाओं में टीबी की वजह से फैलोपियन ट्यूब के चिपक जाने के ज्यादा केस मिलते है। इनकी फिलोपियन ट्यूब को इंडोस्कोपी केमाध्यम से ठीक किया जा सकता है।
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