लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मरीजों के नाश्ते के साथ भी किचन संचालक लगातार मनमानी कर रहा है आैर जिम्मेदार अधिकारी मौन है। शासन के निर्देशों को धता बताते हुए एक ऐसे ब्राांड का दूध व मक्खन नाश्ते में दिया जा रहा है, जोकि मरीजों के लिए नया है आैर ज्यादातर मरीज भी पसंद नहीं कर रहे है, इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। यही नहीं अगर इस ब्राांड का दूध नहीं आ पाता है, तो खुला दूध गिलास में दे दिया जाता है। तीमारदारों का आरोप है कि अगर कु छ देर बाद दूध का पकाने के लिए जाओ तो दूध बहुत जल्दी फट जाता है।
केजीएमयू प्रशासन लगातार किचन संचालक की मनमानी को अनदेखा कर रहा है। यहां मरीजों को सुबह नाश्ते में मक्खन, चार पीस ब्रोड व एक छोटा पैकेट दूध दिया जा रहा है। शासन ने मरीजों को दूध व मक्खन दिये जाने का मानक तय कर रखा है। इसके बाद एक सरकारी दूग्ध कम्पनी का दूध दिया जाना चाहिए। पहले केजीएमयू में सरकारी दूध कम्पनी को मक्खन व दूध आपूर्ति किया जा रहा था। निजी क्षेत्र में किचन संचालन दिये जाने के बाद निजी क्षेत्र की दूग्ध कम्पनी का दूध व मक्खन आपूर्ति किया जा रहा है।
जब कि अन्य निजी क्षेत्र की बड़ी कम्पनियों को नकार दिया गया है। तीमारदारों का आरोप है कि अगर कु छ देर बाद दूध का पकाने के लिए जाओ तो दूध बहुत जल्दी फट जाता है। इसके अलावा अगर निजी क्षेत्र की कम्पनी का दूध की आपूर्ति नहीं होती है तो प्लास्टिक के गिलास में दूध बांटा जाता है। जबकि नियमानुसार पैकेट ही दिया जाना चाहिए। केजीएमयू के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि अब लगातार किचन संचालक अपने तरीके से किसी भी कम्पनी का दूध दे सकता है अगर खुला दूध गिलास में देता है तो गलत है। शिकायत आने पर जांच करायी जाएगी।
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