लखनऊ । आंकड़े बताते हैं कि युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर बढ़ रहा है और सबसे खास बात यह है कि ज़्यादा संख्या में लोगों में यह कैंसर एडवांस्ड स्टेज पर सामने आ रहा है। इस बीमारी होने की संदेह होने पर जांच कराने के लिए जागरूक होना चाहिए। यह जानकारी लखनऊ कैंसर इंस्टीट्यूट के चीफ कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विवके गर्ग ने दी।
उन्होंने बताया कि इसके मामले बढ़ने के पीछे बदलती जीवन शैली है। इसके अलावा पर्यावरणीय एवं अनुवांशिकी कारक भी हो सकता है। अभी तक इस बारे में अधिक जानकारी अभी नहीं मिल सकी है, लेकिन अधिक से अधिक युवाओं 30 वर्ष और 40 वर्ष के लोगों में यह बीमारी ज्यादा मिल रही है।
डॉ. गर्ग बताते हैं कि युवाओं में कोलोक्टल कैंसर होने के लक्षणों पर ध्यान दे अगर उनके अधिक लक्षण पाया जाते है, तो 50 वर्ष से पहले की उम्र से जांच करा लेनी चांिहए, जिससे कि यह बीमारी तभी पकड़ में आ जाए जब यह किसी एक ही जगह तक सीमित हो और इसके सफल इलाज की संभावना भी ज़्यादा हो।
किसी व्यक्ति को कोलोरेक्टल कैंसर होने का जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में उम्र, पारिवारिक इतिहास, अन्य परिस्थितियों जैसे ओवेरियन कैंसर या आंतों में सूजन की बीमारी, नियमित तौर पर शराब का सेवन, धूम्रपान और मोटापा शामिल हैं, हालांकि ये जोखिम कारक सिर्फ कोलोरेक्टल कैंसर की ही विशिष्ट वजह नहीं हैं और इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह करें। ज़्यादातर चिकित्सकीय समूह 50 वर्ष की उम्र के बाद नियमित तौर पर जांच कराने की सलाह देते हैं, जबकि ऑन्कोलाजिस्ट्स का कहना है कि जिन लोगों में कैंसर होने की आशंका हो उन्हें कम उम्र से ही नियमित तौर पर जांच कराते रहनी चाहिए। कोलोरेक्टल कैंसर के संभावित लक्षण, लेकिन यह लक्षण किसी अन्य बीमारी के भी हो सकते है। डाक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
- पाचन सम्बधी समस्याओं का लगातार बने रहना
- रेक्टल ब्लीडिंग
- मल के साथ खून निकलना
- अचानक बिना किसी वजह के वज़न घटना
- थकान लगातार
- मलोत्सर्जन में बदलाव आना
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