डेस्क। ओरल कैंसर महामारी के रूप में फैल रहा है। विशेषज्ञ मानते है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सिर्फ अपने देश में अगले तीन साल में करीब नौ लाख लोगों इसकी चपेट में आकर अकाल मौत के शिकार हो सकते है।
अगर इंडियन कांउसिल मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार देश में कैंसर की बीमारी तेजी बढ़ रही है उसके कारण 2020 तक 17.3 लाख लोग कैंसर की बीमारी की चपेट में होंगे। इनमें से करीब 8.8 लाख लोग इसकी वजह
से जान गवां देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के इलाज में खर्च तथा बिगड़ती अर्थव्यवस्था को लेकर देशों की चिंताएं भी
बढ़ती जा रही है। ब्रिाक्स ने जल्द ही में एक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी किया है, जिसके मुताबिक केवल इन पांच ब्रिाक्स देशों में ब्रााजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका में 2012 में कैंसर से संबंधित मौतों ने इनकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया। आंकड़ों के अनुसार बीमारी के चलते इन देशों को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 तक तम्बाकू जनित उत्पादों के सेवन से न केवल देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित
हुई है बल्कि इसकी जीडीपी में भी गिरावट दर्ज की गई है। कैंसर के उपचार पर हुए भारी भरकम खर्च की वजह से 2012 में भारत ने कुल कार्यक्षमता में 6.7 अरब की कमी दर्ज की गयी जो आर्थिक विकास दर का 0.36 प्रतिशत है।
केजीएमयू के डेंटल विभाग के ओरल कैंसर विशेषज्ञ डा. यू एस पाल की माने तो ओरल कैंसर के लक्षण दिखते ही इसकी विशेषज्ञ के परामर्श से इलाज किया जाए तो रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग ओपीडी में आते है आैर उनकी जांच के बाद चेतावनी देने के बाद भी वह लोग गुटखा, मसाला का सेवन नहीं बंद करते है आैर बाद उन्हंे जबड़े की जटिल सर्जरी होती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए पोर्टल बनाया है जिसमें कहीं भी कही से मरीज विशेषज्ञ परामर्श दिया जा सकता है। इसके बाद जांच के लिए केजीएमयू भी बुलाया जा सकता है।
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