यहां 30 लग चुके है कृत्रिम स्तन

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लखनऊ । एसजीपीजीआई के इण्डोक्राइन, ब्रेस्ट सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी तथा रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग द्वारा ब्रेस्ट कोर्स – 2018 का संयुक्त आयोजन किया जा रहा है। ब्रेस्ट कोर्स -2018 का यह आयोजन एसोसिएशन ऑफ, ब्रेस्ट एस्थेटिक्स एण्ड रिक ंसट्रक्टिव सर्जरी के वार्षिक सम्मेलन, ब्रेस्टकॉन- 2018 के तत्वाधान में किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देश विदेश के विशेषज्ञ एकत्रित होंगे जो अपनी सर्जिकल तकनीक की जानकारी देंगे। यह जानकारी कार्यक्रम के ऑरगनाइजिंग चेयरमैन व एसजीपीजीआई के प्रो.गौरव अग्रवाल ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि इस तरह का आयोजन प्रदेश में पहली बार हो रहा है।

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इसकी खास बात यह है कि यहां एक छत के नीचे इन्डोंक्राइन सर्जन,प्लास्टिक सर्जन, ब्रेस्ट सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, किमोथेरेपी, रेडियेशन, पैथालॉजिस्ट तथा मेडिकल कालेजों में पढने वाले मेडिकोज एकत्र होंगे।
प्रो. गौरव का कहना है कि मौजूदा समय में स्तन कैंसर के रोगियों की संख्या में इजाफा जरूर हुआ है, लेकिन जागरूकता के कारण वह समय रहते विशेषज्ञ डाक्टरों के पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे उनके बीमारी से निजात भी मिल रहा है। प्रो.गौरव ने बताया कि स्तन कैंसर का इलाज और भी गुणवत्ता पूर्ण हो सकता है, यदि टीम वर्क के साथ काम किया जाये। उन्होंने बताया कि इसी के मद्देनजर यह आयोजन किया जा रहा है।

30 मरीजों के लग चुके है कृत्रिम स्तन

ब्रेस्टकॉन के आयोजक सचिव व पीजीआई के प्लास्टिक सर्जन डा.अंकुर भटनागर ने बताया कि पीजीआई में स्तन कैंसर के 30 मरीजों में कृत्रिम स्तन सफलता पूर्वक लगाये जा चुके हैं, लेकिन ये सबकुछ टीम वर्क के कारण ही संभव हो सका है। अकेले कुछ भी नहीं किया जा सकता है। इस तरह का टीम वर्क बनाने के लिए इसबार, ब्रेस्ट कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। डा.अंकुर के मुताबिक कृत्रिम, ब्रेस्ट के निर्माण में इम्प्लांट लगाना पड़ता है,जबकि कुछ मामलों में, ब्रेस्ट रीकंस्ट्रक्शन करना पड़ता है। पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले मरीजों में 10 प्रतिशत मरीज ही रीकंस्ट्रक्शन कराते हैं, जबकि स्तन कैंसर के इलाज में सर्जरी के साथ ही ,ब्रोस्ट का रीकंस्ट्रक्शन मरीज करा ले तो बेहतर रहता है।


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