NMC बिल के विरोध में उतरे डॉक्टर

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नेशनल मेडिकल कमीशन लाने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वïान पर राष्टï्रव्यापी हड़ताल का राजधानी में व्यापक असर देखने को मिला। इसके तहत जहां एक ओर सरकारी चिकित्सकों ने काला फीता बांधकर विरोध जताया वहीं अधिकांश चिकित्सा संस्थान बंद रहे। राजधानी के लगभग ३५० नर्सिंग होम,४०० पैथालॉजी तथा ५०० क्लीनिक इस हड़ताल में शामिल थीं। लेकिन कुछ निजी संस्थानों में मरीजों की समस्याओं को देखते हुए इलाज मुहैया कराया जा रहा था। इसके अलावा इन निजी संस्थानों में इमरजेंसी सेवायें शुचारू रूप से चल रही थीं। सुबह से शुरू हुयी यह हड़ताल शाम के चार बजे समाप्त हो गयी।

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राजधानी में आईएमए की हड़ताल में चिकित्सकों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया इस इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के लखनऊ शाखा के अध्यक्ष प्रो.सूर्यकांत ने कहा कि ये आईएमए की हड़ताल का ही नतीजा रहा कि केंद्र सरकार को नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने के लिए जो बिल ला रही थी,उसे वापस लेना पड़ा है। हमारे चिकित्सक अब किसी भी कीमत पर इंस्पेक्टर राज को बरदास्त नहीं करेंगे।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन लखनऊ शाखा के प्रवक्ता डा.पीके.गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने के लिए जो बिल ला रही है, इस बिल के विरोध में ही ये हड़ताल बुलाई गई है। जिसका आईएमए ने राष्टï्रीय स्तर पर विरोध किया और उसका असर भी देखयी पड़ा। आईएमए की हड़ताल के चलते ही सरकार को वापस लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि  अगर ये बिल आता है तो इससे इलाज बहुत महंगा हो जाएगा। साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में इलाज की गुणवत्ता पर बुरा असर होगा। जिसमें नुकसान सिर्फ और सिर्फ मरीज का ही होगा।

नेशनल मेडिकल कमीशन बन जाने के बाद मेडिकल कालेज में नीट को जरिए जो छात्र प्रवेश लेंगे। उनमें से ४० प्रतिशत छात्रों के लिए मेरिट का कटऑफ निर्धारित होगा,जबकि ६० प्रतिशत छात्रों को केवल नीट पास करना होगा और उनकों मनेजमेंट कोटे के जरिए भारी भरकम फीस लेकर एडमिशन दे दिया जायेगा। इतना ही नहीं जो लोग विदेश से एमबीबीएस करेंगे। उन्हें भारत में कोई परिक्षा नहीं देनी होगी और उनका सीधे रजिस्ट्रेशन होगा।

उन्होंने बताया कि इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रप्रोजल है। इसे करने के बाद आयुष के चिकित्सक मॉडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे। इस बिल में ऐसे प्रावधान हैं जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी मॉडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की अनुमति मिल जाएगी। जबकि इसके लिए कम-से-कम एमबीबीएस क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। इससे नीम ,हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जाएंगे।

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