मुम्बई । फोग्सी (एफओजीएसआइ- फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स ऐंड गाइनकोलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया) ने एमएसडी फॉर मदर्स, मैकआर्थर फाउंडेशन और झपाएगो (जॉन हॉपकिन्स युनिवर्सिटी से संबद्ध) की साझेदारी में मान्यता का शुभारंभ किया। मान्यता एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन है जिसका उद्देश्य प्रसव के दौरान और तुरंत बाद, जब घातक जटिलतायें सबसे अधिक होती हैं, माताओं की उत्तम देखभाल की आवश्यकता का प्रचार-प्रसार करना है। इस अभियान को बॉलीवुड अदाकारा शिल्पा शेट्टी और पंकजा मुंडे, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, महाराष्ट्र सरकार ने हरी झंडी दिखाई।
भारत में हर साल प्रसव के दौरान करीब 45,000 स्त्रियों की मृत्यु हो जाती है, जबकि मुत्यु के कारणों का निवारण पूरी तरह संभव होता है। यह आन्दोलन इस समझ पर आधारित है कि भारत में गर्भावस्था में सांस्कृतिक तौर पर माताओं की अपेक्षा शिशुओं के बारे में अधिक चिंता की जाती है। माता का स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण और उतना ही मूल्यवान है जितना कि बच्चे का स्वास्थ्य और उनकी तंदुरुस्ती हमारी सामूहिक जिम्मेवारी है।
फोग्सी ने लाँच किया मान्यता – भारत में माताओं की देखभाल की गुणवत्ता के लिए एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन
‘मान्यता’ सभी हिस्सेदारों को एकजुट होने और इस सच्चाई के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आह्वान करता है कि माताएँ भी शिशुओं के समान ही महत्वपूर्ण हैं। उन्हें वैसे साधन की आवश्यकता है जिससे वे गर्भावस्था के दौरान अपनी देखभाल के लिए सोच-समझकर सही जगह का चुनाव कर सकें, क्योंकि न्यूनतम देखभाल उनका बुनियादी अधिकार है।
एक अगले कदम के तौर पर इस आन्दोलन के अंतर्गत मातृत्व सेवाओं में उत्कृष्टता का स्थापित मापदंड अपनाने के लिए निजी प्रसूति सेवा प्रदाताओं को लक्षित करने का काम आरंभ किया भी जा चुका है। फोग्सी, एमएसडी फॉर मदर्स और झपाएगो ने जमीनी स्तर पर शिक्षण और निजी प्रसूति सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण का काम आरंभ कर दिया है ताकि वे विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार फोग्सी के सावधानीपूर्वक चयनित साक्ष्य-आधारित मापदंड को अपनायें और उनका पालन करें। अन्य बातों के अलावा, इनमें प्रसव पीड़ा, प्रसव और प्रसव के तुरंत बाद की अवधि में देखभाल की चिकित्सीय पद्धतियाँ सम्मिलित हैं।
ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा, अब समय आ गया है जब हमें महिलाओं, उनकी जरूरतों, उनके स्वास्थ्य पर फिर से केंद्रण करना चाहिये। खासतौर से तब जब वो गर्भवती हों। मान्यता को सिर्फ निजी अस्पतालों तक ही सीमित नहीं करना चाहिये, बल्कि हमें देश भर के सभी सार्वजनिक अस्पतालों में भी इसे लागू करने की दिशा में काम करना चाहिये।
इस पहल के बारे में शिल्पा शेट्टी ने कहा कि, अब समाज के लिए प्रसव के दौरान संसार को अनमोल उपहार देने वाली माताओं के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती पर भी जन्म लेने वाले शिशु के समान ही ध्यान देने का समय आ गया है। एक माँ होने के नाते मुझे यह देखकर खुशी होगी कि हर कोई इस आन्दोलन से जुड़े और संभावित माताओं को खुद की उत्तम देखभाल पर जोर देने की अपील करे। प्रचलित संस्कृति के अनुसार स्त्रियों को त्याग का प्रतीक माना जाता है और अपने बच्चों और अपने जीवनसाथी के बाद ही खुद के बारे में सोचना उनकी नियति बना दी गई है। यह पूरी तरह एक गलत धारणा है। मातृत्व के मामले में हमें अपने लिए सर्वश्रेष्ठ देखभाल की अपेक्षा अवश्य करनी चाहिए। परिचारकों को भी चाहिए कि वे माताओं पर भी उनके शिशुओं के समान ही बराबर ध्यान दें।