4 0 सेकंड में कोई न कोई आता है इस बीमारी के चपेट में

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लखनऊ । स्ट्रोक (पक्षाघात) एक सामान्य बीमारी कही जाती है। फिर भी अगर पूरे विश्व स्तर पर आकंलन करे, तो हर 40 सेकेंड के अन्तराल में किसी न किसी को पक्षाघात हो रहा है। इतना ही नहीं प्रत्येक 4 मिनट में कोई न कोई व्यक्ति स्ट्रोक के कारण अपनी जान गवा रहे हैं। यहां पक्षाघात मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण कहा जाता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.आर.के. गर्ग ने दी।

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पक्षाघात को लेकर जागरुकता लाने के लिए कार्यक्रम सोमवार को आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि अमेरिका जैसे विकसित देशांे में स्ट्रोक के रिस्क कारकों को नियन्त्रित किया है आैर इस बीमारी को पाँचवे नम्बर पर ला खड़ा कर दिया है।

प्रो.आर.के.गर्ग का कहना है कि स्ट्रोक होने का मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, शराब का अत्याधिक सेवन, वसीय पदार्थों का अत्याधिक सेवन,ह्मदय रोग, जीवन शैली में व्यायाम की कमी एवं प्रतिदिन खान पान में हरी सब्जियाँ और फलों के सेवन की कमी का होना है।

कार्यक्रम में न्यूरोलॉजी के वरिष्ठ प्रो. राजेश वर्मा की माने तो यदि बीमारियों से होने वाले जोखिम पर ध्यान दिया जाय, तो स्ट्रोक को निश्चित तौर पर कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में डायबिटीज एवं हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ रहा है और इन माप दंडों में भारत वर्ष विश्व के अग्रणी देशों में से एक है।

उन्होंने बताया कि विश्व स्ट्रोक संगठन ने विकासशील देशों के लिए पक्षाघात के बचाव के सम्बन्ध में अभियान छेड़ रखा है। विश्व स्ट्रोक संगठन ने जन जागरण अभियान के तहत पक्षाघात दिवस 29 अक्टूबर के माध्यम से समाज को बताया है कि स्ट्रोक एक एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज सम्भव है। बशर्ते लोग इस बीमारी को जाने और जागरुक रहे। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति को स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों को समझने की आवश्यकता है। अगर शरीर के एक तरफ अचानक मुंह, हाथ, पैर में कमजोरी या सुन्न हो जाना, अचानक दिमाग की चेतना को खोना, बोलने में दिक्कत या दूसरे की भाषा को समझने में परेशानी, अचानक आँखों की रौशनी में कमी होना, चलने की समस्या, चक्कर आना या संतुलन खोना इत्यादि प्रमुख है। प्रो. राजेश वर्मा ने स्ट्रोक के बाद होने वाली यादाश्त की कमी एवं अन्य दिमाग की परेशानियों पर शोध किया है

प्रो.नीरज कुमार ने बताया कि स्ट्रोक का त्वरित इलाज की सुविधा केजीएमयू के इमरजेन्सी विभाग में उपलब्ध है,क्योंकि स्ट्रोक के इलाज के लिये मरीजों को स्ट्रोक होने के तीन घंटे के अन्दर अस्पताल पहुंचा जरूरी होता है। स्ट्रोक मरीज के लक्षण समझने कि आवश्यकता है। ऐसा इसलिये कि स्ट्रोक के इलाज में जो दवा दी जाती है , वह स्ट्रोक होने के बाद 4.5 घंटे में ही सम्भव है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मरीज का केजीएमयू में तीन घंटे के अन्दर पहुंच सके, जिससे मरीज को इलाज जल्द से जल्द शुरू हो सके। इसके लिये न्यूरोलाजी विभाग का स्ट्रोक हेल्पलाइन नम्बर (8887147300) उपलब्ध है।
डा.श्वेता पाण्डेय की माने तो स्ट्रोक होने पर मरीज का सही समय पर उसका इलाज जरूरी है। इलाज के अभाव में यदि जान बच भी जाये तो स्ट्रोक के बाद
अलग -अलग तरह की समस्याएं पैदा हो जाती है, जिससे जीवन यापन मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के बाद होने वाली जटिलताओं में यादाश्त की कमी, विशाद, भाषा समझने में या बोलने में परेशानी, मांसपेशियों का जकड़ना- हड्डीयों का टूटना एवं लकवा ग्रस्त होना विशेष तौर पर देखे जाते हैं।

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