अतिव्यस्त दिनचर्या के बावजूद लोगों के बीच फिटनेस के ओर लोग ध्यान देने लगे है। सर्वेक्षण के अनुसार देश की 60 प्रतिशत आबादी प्रत्येक सप्ताह चार घंटे खुद को स्वस्थ्य रहने के लिए समय निकाल कर खर्च करती है। देश भर के आठ शहरों में 20 से 35 साल की आयु वर्ग के जिन 1,500 से अधिक पुरुषों (54 प्रतिशत) और महिलाओं (46 प्रतिशत) को सर्वे में शामिल किया गया था।
‘फिटनेस फार लाइफ केा यूथ तक पहुंचाने के मकसद से रीबॉक इंडिया ने देश में पहली बार फिटनेस सर्वेक्षण कराया है। सर्वेक्षण में निकल कर आया कि देश में फिटनेस के लिए लोग बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे है। सर्वेक्षण मे 10 लोगों से फिटनेस के प्रति बात करने पर 9 लोगों ने कहा कि फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही 80 फीसदी से अधिक लोग स्वस्थ्य जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
जबकि सर्वेक्षण में शामिल 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा कि वह सप्ताह में फिटनेस पर चार घंटे से अधिक समय देते हैं और इस तरह वह बेहतर स्वास्थ्य व फिटनेस के लिए आलस्य का त्याग कर चुके हैं।
सर्वे में यह देखा गया कि शहरों में दौड़ लगाने को सबसे बेहतर फिटनेस के तोैर पर देखा गया है। इसकी लोकप्रियता की प्रमुख वजहों में जरूरी उपकरणों पर सीमित निवेश के तौर पर भी देखा जा सकता है। लोंगों ने मैराथन में भी लोगों की सक्रिय भागीदारी देखी जाती है और सर्वेक्षण में शामिल 56 फीसदी लोगों ने हर दो साल में कम से कम एक मैराथन में भाग लिया है।
दूसरेलोकप्रियता के पायदान पर योग है तथा शहर में करीब 70 फीसदी लोग तनाव या चिंता कम करने के लिए अब योगाभ्यास व मेडिटेशन पर ध्यान देने लगे है। अगर देखा जाए तो पारंपरिक गतिविधियों के अलावा लोग क्रॉसफिट, मिक्स्ड मार्शल आर्ट, किकबॉकिं्सग तथा कॉम्बैट ट्रेनिंग से भी परिचित हैं।
यहां स्ट्रैन्थ वर्कआउट अब महिलाओं व युवतियों के बीच भी लोकप्रिय हो चला है और करीब 41 फीसदी महिलायें इससे जुड़ी हैं। अधिकांश महिलाएं फिटनेस में सुधार तथा आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से स्ट्रैन्थ वर्कआउट करती हैं।
80 फीसदी से अधिक महिलाएं सेहतमंद जीवनशैली के लिए पूरी तरह सजग होकर प्रयास करती हैं। सिर्फ एक तरह का व्यायाम करने की बजाय 65 फीसदी ग्रुप में या अपने पार्टनर के साथ स्ट्रैच, बैंड, रन और स्क्वैट करना पसंद करती हैं। सर्वेक्षण से यह भी खुलासा हुआ है कि भारतीय अपनी फिटनेस बरकरार रखने के लिए सिर्फ एक किस्म की एक्टिविटी तक सीमित नहीं रहते। वे तरह-तरह की एक्टिविटी करना चाहते हैं।