लखनऊ | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बुधवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विद्यालय में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में दवाओं का बजट बढ़ाने की मांग की जा सकती है ताकि मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा सके| चिकित्सा विश्वविद्यालय में वेंटिलेटर पर इलाज महंगा होता जा रहा है। विभागों में मंहगी जीवनरक्षक दवाओं की कमी व अन्य सर्जिक ल सामान की कमी बनी हुई है | मजबूरी में दवाएं व सामान बाहर से खरीद कर लाना पड़ रहा है। केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत का कहना है कि शासन से बजट की मांग की गयी है। मिलने पर दवाओं व सर्जिक ल सामान की कमी को दूर किया जाएगा।
जीवन रक्षक दवा व सामान खरीद कर ला रहे हैं तीमारदार –
केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में क्रिटकल केयर यूनिट के तहत अभी तक वेंटिलेटर चलते है। इसके अलावा बाल रोग विभाग क्वीन मैरी में भर्ती होने के बाद उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ने लगता है। भर्ती होने के तुरंत बाद मरीज के तीमारदार वेंटिलेटर किट के साथ मंहगी एंटीबायटिक दवाओं की लिस्ट थमा दी जाती है, जिसका आम तौर पर पहला बिल पांच से सात हजार रुपये तक आता है। इसके बाद मरीज की हालत की गंभीरता के ऊपर दवाओं की निर्भरता करती है। वैसे भी एंटी बायटिक दवाएं लगातार चलती रहती है, अगर मरीज को ट्रैक्सिमिया याना गले में कट कर पाइप लगा पड़ा तो उसके लिए भी किट लानी पड़ती है। वेंटिलेटर के मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि एक दिन में दस से 15 हजार रुपये का खर्च आ जाता है।
उनका कहना है कि यह निजी अस्पतालों से कम है लेकिन गरीब मरीज इसका खर्च वहन नहीं कर सकता है। केजीएमयू प्रशासन ने ट्रामा सेंटर वन के पंचम तल क्रिटकल केयर यूनिट में 36 बिस्तरों पर दो इकाईयों को शुरू किया है। यहीं पर तीसरे तल पर आठ बिस्तरों को बढ़ाया गया है। इसके अलावा सीवीटीएस में चार वेंटिलेटर, स्त्री रोग विभाग में 02 वेंटिलेटर तथा पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में दो वेंटिलेटर सहित कुल 56 वेंटिलेटर लगाये गये है।
लेकिन हकीकत यह है कि इन सभी वेंटिलेटर पर भर्ती शुल्क को कम है लेकिन जीवनरक्षक दवाओं व सर्जिकल सामान की कमी के कारण महंगा हो जाता है। बताया जाता है कि केजीएमयू प्रशासन एचआरएफ के तहत सस्ती दवाएं व सर्जिकल सामान भी मुहैया कराया सकता है। केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत का कहना है कि अभी शुल्क तो नहीं बढ़ाया जा रहा है लेकिन बजट नहीं होने के कारण जीवनरक्षक दवाओं व सर्जिकल सामान की कमी है। इसके लिए बजट की मांग की गयी है। बजट आने पर एंटीबायटिक दवाओं की कमी को पूरा कर दिया जाएगा।