होली के हुड़दंग में 7500 पहुंचे अस्पताल, आधा दर्जन की मौत

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लखनऊ। ट्रामा सेंटर समेत राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराए गए लोगों में 800 लोग होली केहुड़दंग में घायल हुए हैं। मिलावटी खोए की गुझिया व शराब पीने से कई लोग पेट दर्द से पीडि़त थे। इनमें से अधिकतर मरीजों का स्वास्थ्य ठीक हो जाने के बाद उन्हे डिस्चार्ज कर दिया गया है। दुर्घटना में घायल मरीजों की सं या अधिक होने के कारण राजधानी के अधिकतर अस्पतालों के हड्डी रोग वार्ड फुल हो चुके हैं। मरीजों को दूसरे वार्डों में भर्ती करके उनका इलाज किया जा रहा है।

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स्वस्थ्य होने पर अधिकतर मरीजों को किया गया डिस्चार्ज –

राजधानी के बलरामपुर चिकित्सालय में कुल 144 मरीज आए। विगत दो दिनों के अंदर अचानक इतने मरीज अस्पताल पहुंचने से अस्पताल के सभी बेड बिल्कुल फुल हो चुके हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले कई मरीजों का इलाज दूसरे विभाग के वार्डों में भर्ती कर किया जा रहा है। सबसे ज्यादा उन मरीजों की तादात रही जिनकों सड़क दुर्घटना में चोट लगी है। अस्पताल में फूड प्वाइजनिंग की गिर त में आए लगभग एक दर्जन से अधिक मरीज आए थे, जिनमें से अधिकतर मरीजों की सेहत में सुधार आने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन कुछ गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।

अस्पताल में मरीजों को भर्ती किए जाने के लिए की गई थी पर्याप्त व्यवस्था –

ट्रामा सेंटर में सबसे ज्यादा 168 मरीज आए थे, जिनमें से 60 मरीजों को भर्ती किया गया था, जिसमें से अधिकतर मरीज सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले हैं। ट्रामा सेंटर में आठ मरीज ऐसे लाए गए, जिनकी मौत रास्ते में ही हो चुकी थी। ट्रामा में कुल 16 गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर फुल हो जाने के कारण गुरुवार को दोपहर लगभग एक घंटे के लिए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई थी। ट्रामा सेंटर से मरीजों को वार्ड में शि ट किए जाने के बाद मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। यहां पर भी नकली शराब व मिलावटी खोया खाने से पीडि़त एक दर्जन मरीज आए, जिन्हे सरकारी चिकित्सालयों के लिए रेफर कर दिया गया।

सिविल अस्पताल में दो दिन के भीतर कुल 315 मरीज आए, जिसमें कुछ मरीजों की मरहम पट्टी कर उन्हें घर भेज दिया गया। लेकिन गंभीर रूप से घायल लगभग छह मरीजों को भर्ती किया गया है। अस्पताल में एक मरीज हार्ट अटैक का आया था जिसकी रास्ते में ही मौत हो चुकी थी। अस्पताल में आए कई मरीजों की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। बलरामपुर अस्पताल में 20 मरीज ऐसे आए, जिन्हें दुर्घटना में चोटे आई थी, इनमें से 15 गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में फूड प्वांइजिनिंग के भी मरीज आए थे, जिनका उपचार कर घर भेज दिया गया।

इसी प्रकार डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में कुल 160 मरीज आए थे, जिनमें से अधिकतर मरीज सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। हल्की चोट लगे मरीजों का उपचार कर उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन छह मरीजों की हालत ज्यादा खराब थी, जिसके कारण उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर रानी लक्ष्मी बाई चिकित्सालय में कुल 15 मरीज अलग-अलग दुर्घटना में घायल होने के बाद लाए गए थे, कम चोट वाले मरीजों की पट्टी कर उन्हें घर भेज दिया गया। तीन मरीजों को गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें गंभीर अवस्था में ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। लोक बंधु में कुल 30 मरीज आए थे, जिनमे से पांच मरीज को भर्ती किया गया, भाऊ राव देवरस चिकित्सालय में 25 मरीज आए, जिनमें से चार को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है।

ट्रामा में मंगलवार को गंभीर मरीजों को देखने वाले डॉक्टरों की रही कमी –

ट्रामा सेंटर में हड्डी और हेड इंजरी के मरीजों की सं या अत्यधिक होने के कारण विभागों में डॉक्टरों की कमी थी। मरीजों को दिखाने के लिए तीमारदारों को इंतजार करना पड़ा। इसमें कई मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों को परिजनों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। प्रदेश के अन्य जनपदों में सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों के आने का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा।

सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों को नहीं मिला इलाज –

सीएमओ ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सीएचसी और पीएचसी पर दुर्घटना में घायल मरीजों को इलाज देने के लिए अधिकारियों को आदेश दिया गया था, लेकिन अधिकतर सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों को इलाज नहीं मिला सका, जिसके कारण मरीज शहर के बड़े अस्पतालों में इलाज के शनिवार को पहुंचे। इन मरीजों को होली के दिन प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने के लिए विवश होना पड़ा।

होली के हुड़दंग में 108 एंबुलेंस बनी घायलों की मददगार, 7904 लोगों की बचाई जान –

रंगों का त्यौहार होली सोमवार को प्रदश में धूमधाम से मनाया गया। होली पर प्रदेशभर में सामान्य दिनों के मुकाबले काफी अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा मारपीट-झगड़े व स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के भी काफी मामले सामने आए। ऐसे जरूरतमंद लोगों की 108 एंबुलेंस सेवा ने तत्काल चिकित्सा मदद की और उन्हें एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार देते हुए नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। तत्काल उचित इलाज मिलने से 7904 लोगों की जान बच सकी। इसमें लखनऊ के 169 लोग शामिल थे। 108 एंबुलेंस सेवा के लखनऊ स्थित मु यालय से मिली जानकारी के मुताबिक होली के दिन रिकार्ड 7904 इमरजेंसी मामलों में लोगों की 108 ए बुलेंस सेवा के जरिए चिकित्सा मदद की गई, जो कि सामान्य दिनों में 6200 से 6500 इमरजेंसी मामलों तक रहती है।

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