70 में इंजेक्शन की जरूरत ही नहीं, फिर भी लगा देते है इंजेक्शन

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लखनऊ। 70 फीसदी मरीजों में इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता नही होती है। फिर भी मरीजों में को लगता है कि इंजेक्शन से जल्दी फायदा मिलता है। जहां तक हो सके इंजेक्शन के इस्तेमान से बचें। क्योंकि 50 फीसदी इंजेक्शन असुरक्षित होते हैं। इसकी वजह से मरीज को दर्द के साथ सबसे बड़ा खतरा संक्रमण का होता है। इंजेक्शन के बचाव से इस संक्रमण से बचा जा सकता है। यह बातें गुरुवार को पीजीआई और वि व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इंजेक्शन सेफ्टी पर
आयोजित वर्कशाप में पीजीआई के गेस्ट्रो इंट्रोलाजी विभाग के डॉ. राकेश अग्रवाल ने कही। पीजीआई में आयोजित वर्कशाप में नर्सेज और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को इंजेक्शन के प्रयोग के बारे में जागरुक किया गया। यह भी बताया कि जहां तक हो सके इंजेक्शन के प्रयोग से बचें।

वि व स्वास्थ्य संगठन के डा. चंद्रकांता लहरिया बताते हैं कि बुखार व अन्य बीमारियों में जहां तक हो सके खाने वाली दवाएं प्रयोग करें। जब मरीज दवा खाने की स्थिति में हैं वह इंजेक्शन से बचें। डॉ. हलरिया कहते हैं कि शहर व ग्रामीण क्षेत्र में 90 फीसदी दवाएं इंजेक्शन के जरिए दी जा रही हैं। जबकि इनमें से 70 फीसदी मामलों में इंजेक्शन देने की आवश्यकता नही होती है। इंजेक्शन के गलत प्रयोग से संक्रमण की अधिक आशंका परिवार स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय के डा. राजेश और इनक्लेन के डा. राकेश एन पिल्लई ने कहा कि इंजेक्शन के गलत तरीके से प्रयोग की वजह से लोगों
में संक्रमण होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। डाक्टर और मरीज में यह धारना होती है कि इंजेक्शन से वह जल्दी ठीक जा जाएगा। इस लिए मरीज इंजेक्शन लगवा लेते हैं।

डॉक्टरों ने बताया कि असुरिक्षत इंजेक्शन के प्रयोग से प्रत्येक वर्ष वि व में 80 से 160 लाख लोग हिपेटाइटिस बी वायरस और 23 से 47 लाख लोग हिपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। असुरक्षित इंजेक्शन के प्रयोग से बचकर ऐसे संक्रमण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इंजेक्शन का इस्तेमाल ऐसे करें –

  • प्रयोग करने से पहले सिरिंज की पैकिंग देखें
  • पैकिंग खुलने के बाद तुरंत सिरिंज प्रयोग करनी चाहिए
  • पहले से खुली हुई सिरिंज और निडिल के प्रयोग से बचें
  • पैकिंग की एक्सपाइरी तारीख देख लें
  • इजेक्शन लगने वाली जगह की त्वचा को साफ करने के बाद ही लगवाएं
  • हाथ साफ सुथरा होने के साथ ही दस्ताना पहनकर इंजेक्शन प्रयोग करें
  • दवा की सीसी में हर बार अलग-अलग सिरिंज और निडिल का प्रयोग करें।
  • प्रयोग की गई सिरिंज और निडिल को सही जगह पर नष्ट करें।

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