5239 कोरोना संक्रमित, 6207 डिस्चार्ज

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लखनऊ। राजधानी में लगातार बढ़ते जा रहे कोरोना संक्रमण के बीच बृहस्पतिवार को राहत भरी खबर आयी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 5239 कोरोना संक्रमित मरीज मिले,जब कि 6207 मरीज कोरोना की जंग जीत लिए। संक्रमण से मरने वाले मरीजों की संख्या भी 19 ही रही। हालांकि कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीज अभी की काफी संख्या में अस्पतालों में भर्ती है आैर कहीं जगह नहीं मिल रही है।
राजधानी में लगातार पिछले दस दिनों से कोरोना संक्रमण का आंकड़ा पांच हजार के ऊपर पहुंच रहा है। बृहस्पतिवार को कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 5239 पहुंच गया। लगातार बढ़ती संख्या के कारण मरीजों को भर्ती नहीं मिल पा रही है। लोग होम आइशोलेशन में रहने को मजबूर है। अगर देखा जाए तो कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा दो से तीन हजार के बीच ही पहुंच रहा था। आज कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा 6207 तक पहुंच गया। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में यह अब तक ठीक होने वाले मरीजों की अब तक के सबसे ज्यादा संख्या है। दूसरी तरह कोरोना संक्रमण से मरने वालो का आंकड़ा 19 रहा। यह ज्यादातर कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीज थे।
वही एनआरएचएम में लैब टेक्नीशियन पद पर तैनात कोरोना योद्धा रीतेश राज मिश्र की आज मौत हो गयी। बढ़ता ही गया। अंतत: आज सुबह केजीएमयू के कोविड आईसीयू में वह कोरोना से जंग हार गये। हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के रीतेश की पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी थी। वह प्राय: रक्तदान शिविरों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। आबकारी विभाग में एसिस्टेंट कमिश्नर जितेंद्र पाल कोरोना की चपेट में थे। बताया जाता है कि लखनऊ टास्क फोर्स में तैनात थे। जानकीपुरम के निजी अस्पताल में जितेंद्र पाल का इलाज चल रहा था। बीती रात अचानक उनके शरीर का ऑक्सीजन लेबल कम होने लगा। डॉक्टरों ने तुरंत वेंटिलेटर की जरूरत बताई। वेंटिलेटर के अभाव में मरीज की मौत हो गई। इसी तरह वृन्दावन योजना कॉलोनी निवासी विनय मलहन (52) को अस्पताल में जगह नहीं मिली। परिवारीजन लगातार सीएमओ कंट्रोल रूम में फोन कर फरियाद करते रहे। कंट्रोल रूम के कर्मचारियों ने जल्द ही एम्बुलेंस भेजने की बात कही। पांच घंटे बाद भी मरीज की भर्ती के लिए सीएमओ कार्यालय का रेफरेंस पत्र तक जारी नहीं हुआ। शाम करीब 3.30 बजे मरीज की सांसें थम गईं। परिजनों का आरोप है कि मरीज को समय पर भर्ती नहीं किया गया। ऑक्सीजन और वेंटिलेटर समय पर न मिलने से मरीज की मौत हुई है।
उधर पीजीआई में कोरोना के संक्रमण से संस्थान के कार्डियो वस्कुलर थेरेपी के विभागाध्यक्ष और असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रसित हो गये हैं। वह आर सी एच 2 में बुखार खांसी आने पर भर्ती है। असिस्टेंट प्रोफेसर वरुणा वर्मा होम कोरोनेटाइन पर है। सी वी टी एस के दूसरे प्रोफेसर के रिश्तेदार भी कोरोना की चपेट में आ गयी है। उनको भी आर सी एच 2 में भर्ती करा कर इलाज दिया जा रहा है। रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन के सचिव अनिल गंगवार को भी कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने पर वह भी कोरोनेटाइन पर है। नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष को भी कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने पर वह भी होम कोरोनटाइन पर है। इस तरह संस्थान के एक दर्जन से अधिक चिकित्सक को कोरोना के संक्रमण ग्रसित है। संस्थान की नसिँग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित अन्य संवगोँ के 300 लोगों को कोरोना के संक्रमण पाजाटिव आने पर 18 बिस्तर भी कम पड़ गए हैं। संस्थान के समस्त संघो ने निदेशक प्रो आर के धीमान से मांग की है कि आर सी एच 2 के समस्त बेड कर्मचारियों के लिए आरक्षित कर दी जाये। कोरोना के इलाज में लोगों को इलाज मुहैया नहीं होगा तो इन कोरोना के मरीजों को इलाज में कौन कार्य करेगा। पहले इन हेल्थ वकॅरो को कोरोना के संक्रमण के लिए बिस्तर तत्काल बढाया जाये। आये दिन यहां के कर्मियों को बिस्तर फुल होने पर इन्हें मना कर दिया जा रहा है। कई कई घंटों तक राजधानी कोविड 19 के अस्पताल एवं आर सी एच 2 में माथा पच्ची के बाद भी इलाज न मुहैया होने पर दम तोड़ दे रहे हैं। इन बिस्तरों को लेकर नसिँग स्टाफ एसोसिएशन की महामंत्री सीमा शुक्ला वी आई पी मरीजों को भर्ती के लिए बिस्तर मिल जा रहा है लेकिन हमारे संस्थान के कर्मियों को बिस्तर नहीं दे रहे हैं। इसको लेकर निदेशक को घेराव करना पड़ता है।

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