लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में मरीजों को सीरींज, गाज, पट्टी, बीटाडीन, वीगो प्लास्ट सहित महत्वपूर्ण दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए सामान बाहर से मजबूरी में लाना पड़ता है। ट्रामा सेंटर प्रशासन का तर्क है कि दवा लेकर अन्य सामान तक की जानकारी स्टोर को दे दी जाती है। केजीएमयू प्रवक्ता डा. सुधीर का कहना है कि दवाओं का स्टाक आता रहता है। कमी न होने दी जाती है। उन्होंने कहना है कि दवाओं आैर अन्य सामान की खरीददारी जारी है।
केजीएमयू के इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में लगभग दो सौ से लेकर तीन सौ मरीज भर्ती होने के लिए आते है। इनमें गंभीर मरीजों को जगह होने पर भर्ती किया जाता है। अन्य का प्राथमिक इलाज किया जाता है। यहां पर एक्सीडेंटल मरीज के इलाज की प्रक्रिया ही इजेंक्शन लगाने, मरहम पट्टी करने के साथ ग्लूकोज चढ़ाने के लिए वीगों से होती है। ग्लूकोज को चढ़ाने वाली ट¬ूब भी नहीं है। यहां पर यह प्राथमिक इलाज का सामान की कमी बनी हुई है।
इसके अलावा वीगों को चिपकाने वाला यूवी प्लास्ट के अलावा इमरजेंसी मेडिसिन की भी कमी बनी हुई है। इसके अलावा वेंटिलेटर या गंभीर मरीजों के इलाज के लिए चेस्ट ट्यूब, सूचर,ईटी ट¬ूब की भी कमी बनी हुई है। इमरजेंसी मेडिसिन या अन्य जरूरी सामान की कमी के चलते इलाज कर रहे डाक्टरों की परेशानी होती है। बताया जाता है कि अगर कोई जूनियर या रेजीडेंट सामान की पर्ची बनाकर बाहर से लाना को कहता है, तो बाहर से इलाज के लिए सामान मंगाने का आरोप लगा दिया जाता है। ऐसे में इलाज करने वाले डाक्टर भी बाहर से दवा लाने के लिए कतराते है। खुद पर्ची न लिख कर दूसरें अन्य पर्ची लिखाकर दवा मंगाना मजबूरी होती है। वेंटिलेटर के लिए इमरजेंसी सामान की कमी को लेकर ट्रामा सेंटर प्रशासन मेन स्टोर को लिखा जाता है। इमरजेंसी में पहुंचे हरदोई के सुरेश के बताया कि एक्सीडेंट में घायल रिश्तेदार है। उसके इलाज के लिए वीगो 18 नम्बर, गाज पट्टी व बीटाडीन, हैंड वाश के साथ हाइड्रोजन आैर कुछ दवाओं को तत्काल मंगाया गया है।














