न्यूज डेस्क। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामलों को दस लाख से कम के आंकड़े पर लाने के भारत के प्रयासों की सराहना डब्ल्यूएचओ ने की है। बुधवार को कहा कि हर बच्चे को ‘ मिशन इंद्रधनुष” के तहत जीवनरक्षक टीके लगाने जैसी कई पहल के कारण यह सब संभव हुआ है। शिशु मृत्युदर आकलन के लिए यूएनआईजीएमई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामलों को कम करने में सकारात्मक रुख देखने को मिला है आैर पांच साल में पहली बार पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले दस लाख से कम होकर 2017 में 9,89,000 पर पहुंच गये हैं।
वर्ष 2016 में भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के 10.8 लाख मामले दर्ज किये गये थे।
डब्ल्यएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि एजेंसी की रिपोर्ट में दुनिया भर में बच्चों की मौत के मामलों में भारत के मामलों की संख्या 2012 में 22 प्रतिशत से कम होकर 2017 में 18 प्रतिशत हो गयी। यह दर वैश्विक कमी से ज्यादा है। सिंह ने कहा, ” देश की उल्लेखनीय प्रगति पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य मंत्रालस द्वारा की गयी अनेक पहलों के चलते संभव हुई है इनमें हर बच्चे को इंद्रधनुष मिशन के तहत टीका लगाना शामिल है ताकि देशभर में डायरिया आैर निमोनिया के प्रबंधन का विस्तार किया जा सके।
डब्ल्यएचओ के बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने ट्वीट कर कहा कि मैं शिशु मृत्यु दर कम करने के सतत प्रयासों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय में अपनी टीम आैर हमारे राज्यो को बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशन में हमारा मंत्रालय नियमित टीकाकरण आैर अस्पतालों में प्रसव पर ध्यान दे रहा है।”
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में प्रत्येक दो मिनट में आैसतन तीन नवजात की मौत पानी की उपलब्धता में कमी, स्वच्छता, पर्याप्त पोषण या सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में होती है।
2017 में करीब 8,02,200 नवजात की मौत दर्ज की गई। यह पांच साल में सबसे कम है।
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