लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा एवं प्राविधिक शिक्षा विभाग मंत्री आशुतोष टंडन गोपाल ने नवनिर्मित महिला छात्रावास एवं संकाय सदस्यों के लिए टाईप-आवास को लोकार्पण किया गया। प्रशासनिक भवन स्थित सेल्बी हॉल में उद्बोधन में श्री टंडन ने कहा कि रेजीडेंट एवं संकाय सदस्यों के लिए विश्वविद्यालय परिसर में रहना अनिवार्य है, इसलिए इनको आवास उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे, कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट सहित अन्य वरिष्ठ डाक्टर मौजूद थे।
यहां की समस्याओं को दूर करने में सम्भव सहयोग दिया जायेगा। केजीएमयू के विकास के लिए इसके द्वितीय प्रांगण का प्रस्ताव भेजा जाएगा। जहां पर शासन यथा सम्भव प्रयास करेगा। वर्तमान सरकार ने दो से तीन वर्षो में 13 और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना कर दी जायेगी। प्रदेश के 5 जिलों बस्ती, बहराइंच, फैजाबाद आदि में 6 माह के अंदर ही नएं मेडिकल कॉलेजों का निर्माण हो जायेगा। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में फायर फाईटिंग की व्यवस्था के लिए महानिदेशक अग्नि शमन एवं महानिदेशक विद्युत द्वारा 200 करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, जिसमे से सरकार द्वारा 50 करोड़ का प्रबंध किया जा चुका है बाकी धनरशि का भी प्रबंध जल्द से जल्द सरकार द्वारा किया जायेगा। प्रदेश के सभी अस्पतालों मे ई हास्पिटल की व्यवस्था पर कार्य चल रहा है। केजीएमयू में ई- हास्पिटल का कार्य काफी हद तक पुरा हो चुका है।
कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने कहा कि नवनिर्मित 178 कमरों के महिला छात्रावास एवं संकाय सदस्यो के लिए 36 टाइप-आवासों के निर्माण के लिए मंत्री एवं प्रमुख सचिव डा. रजनीश दुबे जी को धन्यवाद दिया गया। कुलपति ने कहा कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय में बर्न यूनिट, आर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का निर्माण तथा इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल एवं वेक्टर जनित रोगो उपचार के लिए निर्माण कार्य चल रहा है। कर्मचारियों के लिए एकल कक्ष आवास का भी निर्माण कार्य चल रहा है। प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे ने कहा कि चिकित्सा विश्वविद्यालय के नियमावली और परिनियमावली में संशोधन न होने के कारण संकाय सदस्यो, रेजिडेंट चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को शासनादेश होे जाने के उपरांत भी अभी तक एसजीपीजीआईएमएस के समान वेतन और भत्तें प्राप्त नही हो पा रहे थे, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के संवर्ग पुर्नगठन के कार्य मे भी सहयोग दिया जा रहा है।
चिकित्सा विश्वविद्यालय देश का सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान है। यहां पर 4500 से ज्यादा बिस्तरों पर मरीजो को भर्ती कर इलाज किया जाता हैं। 700 से ज्यादा इमरजेंसी एवं ट्रॉमा के बिस्तर है, 450 के करीब संकाय सदस्य एवं करीब 5500 विद्यार्थी एवं इतने ही कर्मचारी है। मानव संसाधन विभाग, भारत सरकार द्वारा इस वर्ष चिकित्सा विश्वविद्यालय को ओवर ऑल श्रेणी में तीसरा स्थान प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय के नियमावली में इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एवं नर्सिंग का प्रबंध नही जिसकी वजह से इनके लिए अलग भवन का निर्माण नही हो पा रहा है। चिकित्सा विश्वविद्यालय के विस्तार एवं विकास के लिए स्थान की बहुत कमी है इसलिए चिकित्सा विश्वविद्यालय को द्वितीय कैम्पस की अत्यंत अवश्यकता है।
यह कैम्पस चिकित्सा विश्वविद्यालय के निकट ही होना चाहिए। तथा इसके लिए कम से कम 200 एकड़ जमीन प्रदान किया जाए जिसमें विभिन्न उच्च विशिष्टता वाले विभागो जैसे न्यूक्लियर मेडिसिन, रोबोटिक सर्जरी इत्यादि विभागों का संचलान शुरू किया जा सके, किन्तु मरीजो के हित में अगर हमें सरकार द्वारा मरीजो के लिए अतरिक्त बेड प्रदान किए जाएं तो हमे उसे एक से डेढ़ महीने मे संचालित कर सकते है। इसलिए चिकित्सा विश्वविद्यालय में एमसीआई के मानको के अनुसार संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों के पदो का सृजन किया जाए, जिससे विश्वविद्यालय द्वारा नए पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा सके।
डॉ. रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कहा कि यहां संकाय सदस्यों कर्मचारियों के लिए आवास की कमी है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ये देश के पांच अग्रणी संस्थानों में से एक है। संकाय सदस्यों के रिक्त पदों के जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए, इसमें जो रूकावटें पैदा हो रही है उसे जल्द से जल्द दूर कर दिया जायेगा। रेजिडेंट चिकित्सकों की समस्याओं को भी जल्द से जल्द दूर कर दिया जायेगा। केजीएमयू की परिनियमावली का संशोधन महामहिम राज्यपाल के यहां से कराएं इसमें शासन द्वारा पूर्ण सहयोग प्रदान किया जायेगा। कालेज ऑफ स्किल के लिए संशोधित डीपीआर विश्वविद्यालय द्वारा जितना जल्द प्रस्तुत किया जायेगा उस पर उतनी जल्द कार्यवाही की जायेगी। केजीएमयू में संचालित भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए एक अलग सेल बनाएं, जिससे इस काम में और तेजी आयेगी। पिछले 6 माह में चिकित्सा विश्वविद्यालय मे कई विकास के कार्य हुए हैं।
कार्यक्रम में धन्यवाद प्रस्ताव डीन प्रो. विनीता दास एवं संचालन ट्रामा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. संदीप तिवारी ने किया गया।
इस अवसर पर कुलसचिव राजेश कुमार राय, वित्त अधिकारी मो. जमा, प्रो. एसएन शंखवार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, प्रो आरके गर्ग, अधिष्ठाता शोध संकाय, प्रो. जीपी सिंह, अधिष्ठाता, छात्र-कल्याण, प्रो. शादाब मोहम्मद, अधिष्ठाता दंत संकाय एवं सीएमडीएस के प्रबंध निदेशक राजीव निगम सहित विभिन्न संकायों के संकाय सदस्य कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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