लखनऊ। केजीएमयू में मानसिक स्वास्थ्य दिवस के एक दिन पूर्व सोमवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोगें के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की गयी । मानसिक रोग विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति प्रो.एमएलबी.भट्ट तथा विभाग के चिकित्सक डॉ.पीके.दलाल मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान बिशेषज्ञों ने अपनी राय रखी तथा १० अक्टूबर के दिन मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाये जाने की उपयोगिता बतायी। डॉ.पीके.दलेला ने बताया कि हमारे देश में मानसिक बीमारियों के प्रसार की दर १० प्रतिशत होने के साथ लगभग १५० मिलियन भारतीय किसी न किसी मानसिक बीमारियों से ग्रस्त है, इनमें से १.९ प्रतिशत गम्भीर मानसिक रोगों से पीडि़त है। नेशनल हेल्थ सर्वे २०१५-१६ के अनुसार हमारे उत्तर प्रदेश में ६.१ प्रतिशत लोग मानसिक बीमारियों से ग्रस्त है। इनमें गम्भीर मानसिक बीमारियों, सामन्य मानसिक समस्याएं एवं कई तरह की व्यवहारिक समस्याएं शामिल है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए उपलब्ध सेवायें बिल्कुल ही अपार्याप्त है। विश्व स्वास्थ संगठन की वर्ष २०१४ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति लाख जनसंख्या पर मात्र ०.३ मनोचिकित्सक उपलब्ध है, जबकि अमेरिका जैसे विकसित देशों में यह अनुपात 7 प्रति लाख से ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता एवं उपलब्धता के मध्य ज्यादा अन्तराल होने के कारण सामुदायिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम एवं प्रबन्धन के सन्देश का प्रचार-प्रसार अत्यन्त आवश्यकता है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का आयोजन इस दिशा में एक प्रयास है।
साधारण भाषा में मानसिक स्वास्थ्य का रोजमर्रा के कार्यों को सम्पन्न कर पाने की योग्यता एवं समस्त मनोरंजक घटनाओं में आनन्द लेने की क्षमता, परिवार बनाने, सन्तानोत्पत्ति एवं उनके पालन-पोषण कर पाने की क्षमता, उद्देश्यपरक कार्य करने एवं नियम-कानून के उल्लंघन से दूर रहने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानसिक स्वास्थ्य को न केवल मानसिक बीमारियों की अनुपस्थिति बल्कि मानसिक शारीरिक एवं सामाजिक कुशलक्षेम के रूप में परिभाषित किया है।












