दस हजार सर्जरी कर यह विभाग बन गया….

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जनरल सर्जरी विभाग का 63 वां स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए उसके स्थापना दिवस का दिन बड़ा ही गौरवशाली होता है। आप वर्ष भर कार्य करने के पश्चात इस दिन को गर्व से मनाते है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का नाम विश्व पटल पर बड़े ही गर्व से लिया जाता है। यहां के डाक्टर विश्व में संस्थान का नाम रोशन कर रहे है। श्री टंडन कंन्वेशन सेंटर में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। समारोह में विशेषज्ञ सर्जन नयी तकनीक से सर्जरी करने की जानकारी दी।

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उन्होंने कहा कि सर्जरी विभाग द्वारा माईनर और मेजर कुल 10,000 हजार सफल सर्जरी वर्ष भर मे किया गया है यह एक बड़ी उपलब्धि है। यहां के वरिष्ठ डाक्टर और रेजिडेंट डॉक्टर बहुत ही ईमानदारी से अपना कार्य कर रहे है , किन्तु फिर भी आप लोग अपने कार्य व्यवहार में सेवा भाव रखना होगा।

कार्यक्रम में विभाग प्रमुख प्रो. एए सोनकर की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस विभाग में 6 कार्यरत इकाई है। विभाग द्वारा गत वर्ष 670 लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई जबकी ओपेन सर्जरी कुल 100 से भी कम की गई है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। विभाग द्वारा कुल 10,000 मेजर एवं माइनर सर्जरी की गई है। विभाग द्वारा स्तन, उदर, थायरॉयड, ओरल, एनल इत्यादि सर्जरी की जा रही है। विभाग के अंदर से कई उच्च उत्कृष्टता वाले विभागों का सृजन किया गया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ केके गुप्ता, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि चिकित्सा विश्वविद्यालय पुरे प्रदेश की मेडिकल सेवाओं में अहम भुमिका निभाता है। यहां पूरे प्रदेश से मरीज अपना इलाज कराने आते है। सर्जरी विभाग को सेंट्रलाइज्ड वर्किंग प्लान मिले इसके लिए मै पूर्ण प्रयास करूंगा। केजीएमयू कुलपति प्रो. मदनलाल ब्रह्म भट्ट जी ने कहा कि यह सर्जरी विभाग चिकित्सा विश्वविद्यालय का सबसे पुराने विभागों एवं सबसे गौरवशाली विभागो में से एक है। चिकित्सा विश्वविद्यालय को देश के 1000 से अधिक विश्वविद्यालयों के बीच एनआईआरएफ की रैकिंग मे 16 वां स्थान प्रदान किया गया हैं।

प्रो. गंगा राम वर्मा ने अपने व्यख्यान में बताया कि पित्त की थैली का कैंसर बहुत ही कॉमन कैंसर है जब तक मरीज चिकित्सक के पास आता है तब तक मर्ज बढ़ चुका होता है। ऐसे 20 से 30 प्रतिशत मरीजो मे हम सर्जरी कर पाते है। किन्तु गाल ब्लैडर की नॉन कैंसर बीमारी भी कैंसर की तरह होती है जिसे हम एफएलपी पेट सीटी स्कैन के माध्यम से पहचान सकते है। और ऐसे नॉन कैंसरस बीमारी में हम बहुत बड़ी सर्जरी करने से बच सकते है। बहुत से नॉन कैंसर गॉल ब्लैडर के ऐसे मरीज होते जिनकी बड़ी सर्जरी हो जाती है ऐसे मरीजो की संख्या कुल मरीजो के 18 से 20 प्रतिशत होती है जबकी इनमें बड़ी सर्जरी की अवश्यकता नही होती है। पित्त की थैली के ऐसे 3 से 5 प्रतिशत मरीज होते है जिनको पित्त की थैली में कैंसर हो जाता है। ऐसे मरीज जिनका पित्त की थैली मे 3 सेंटी मीटर से बड़ा स्टोन हौ और थैली की दिवाल मोटी हो और थैली इरेगुलर हो ऐसे मरीजो में कैंसर की सम्भवाना अधिक होती है।

प्रो. आशिफ जह ने अपने व्याख्यान में बताया कि 40 से 50 प्रतिशत लोगो के लिवर मे फैट अधिक होता है। ये समस्या शहरी क्षेत्रों मे ज्यादा पाई जाती है। इनमे 14 से 15 प्रतिशत लोगो में नैश गम्भीर फैटी लिवर की समस्या होती है। ऐसे मरीजो का लिवर धिरे-धिरे डैमेज होने लगता है जिससे लिवर सख्त हो जाता है, लिवर मे खुन का बहाव कम हो जाता है और धिरे धिरे लिवर फेल होने लगता है। फैटी लिवर की समस्या ज्यादातर लोगो के खान पान से बढ़ रही है आज कल लोग उच्च कैलोरी का भोजन ले रहे है और व्यायाम कम कर रहे है इससे लिवर में फैट जमा हो रही है। ऐसे फैटी लिवर को नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर कहते है।

नॉन एल्कोहलिक लिवर की बीमारी वर्ल्ड में नम्बर एक पर है इण्डिया में यह तीसरे नम्बर पर है। फैटी लिवर के साथ एल्कोहल पिने पर यह कई गुना ज्यादा तेजी से बढ़ती है। इससे बचने के लिए वजन पर ध्यान देना चाहिए खाने में फैट और ज्यादा कैलोरी लेने से बचना चाहिए, और खुब कसरत करनी चाहिए। इसको पता करने के लिए फाइब्रो स्कैन कराना चाहिए। एलएफटी के माध्यम से यह तब पता चलता है जब यह नैश की स्थिति में पहुंच जाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. विनोद जैन ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में समर्पित शिक्षकों और प्रेरित विद्यार्थियों और उत्साहजनक वातातरण के बीच का सम्बंध है। जिससे जनता को काफी उम्मीद है।


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