नींद न आने का कहीं यह कारण तो नहीं … विशेषज्ञ से ले परामर्श

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विश्व अनिद्रा दिवस आज

 

लखनऊ। अगर देखा जाए तो हर दूसरा व्यक्ति नींद से जुड़ी कोई ना कोई दिक्कत बनी रहती है। किसी को रात में पूरी तरह नींद नहीं आती। तो किसी की रात में नींद टूटने पर करवटें बदलते गुजरती है। शिकायत कर रहा है। इस कारण लोगों को दिन में परेशानी और बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
आयुर्वेद के विशेषज्ञ संजीव रस्तोगी का कहना है कि अनिद्रा की बीमारी आजकल लोगों में बढ़ती जा रही है लेकिन महिंद्रा का कारण क्या है इसका गहन पड़ताल करने के बाद ही दवाओं का सेवन करना चाहिए सामान्य तौर पर रात में सोते वक्त एक गिलास गुनगुना दूध पीना ही इस बीमारी को कम कर सकता है लेकिन काफी लोग मानसिक और शारीरिक रूप से थके नहीं होते हैं। इस कारण भी उन्हें पूरी तरह से नींद नहीं आती है कई लोग विभिन्न प्रकार के बातों का मंथन करते रहते हैं और तनाव में रहते हैं । इस कारण भी नींद नहीं आती है या बार-बार टूट जाती है। वर्तमान में लोगों को जीवन शैली में परिवर्तन और योग्य डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही दवाओं का सेवन करना चाहिए।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला कहते हैं कि अच्छी स्वास्थ्य के लिए भरपूर नींद जरूरी है। नींद में गड़बड़ी से स्वास्थ्य को बीमार कर सकता है। उन्होंने बताया कि बहुत अधिक सोना या कम नींद आना दोनों ही घातक हैं। अधिक सोने से मोटापे की समस्या पैदा हो जाती है। इससे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

वही दूसरी ओर लोहिया संस्थान में कॉर्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अच्छी नींद लेनी चाहिए। सात से आठ घंटे सोना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की खलल सेहत को नुक़सान हुआ ए पहुंचाती है। इससे कम या ज्यादा सो रहे हैं तो इसका असर दिल पर पड़ता है। अधिक या कम सोने पर कोरोनी हार्ट डिसीज का खतरा बढ़ जाता है।

कम या बहुत अधिक सोने पर इसका असर शरीर के इंसुलिन निर्माण व खपत पर भी पड़ता है। इससे डायबिटीज हो सकती है। अधिक सोने पर फिजिकली एक्टिविटीज बेहद कम हो जाती हैं। इससे ब्लड शुगर स्तर गड़बड़ाने की आशंका बढ़ जाती है।
यदि कम या अधिक सो रहे हैं तो इससे बैक पेन की समस्या हो सकती है. इसलिए नींद प्रॉपर लेनी चाहिए. कई बार एक्टिविटीज कम होेने के कारण भी यह समस्या हो जाती है. इससे ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं रहता है।

नींद न आने के प्रमुख कारण
1. एंग्जाइटी का होना
2. स्लीप एप्निया डिसीज
3. इंसोम्निया की प्रॉब्लम होना
4. रात को सोने से पहले फोन का प्रयोग
5. खराब लाइफ स्टाइल
6. देर से सोना, देर से उठना
7. मोटापा होना
8. अधिक कैफीन लेना

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