लखनऊ। बिना कारण डॉक्टर से मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जिद भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि बेवजह प्लेटलेट्स चढ़ाने से कई तरह की बीमारियां या संक्रमण हो सकता है, क्योंकि डेंगू-मेलरिया या किसी भी तरह के दूसरे बुखार में प्लेटलेट्स काउंट स्वत: ही कम हो जाता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के हेमैटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एके त्रिपाठी ने शनिवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में एसोसिएशन फिजिशियन ऑफ इंडिया की तरफ से मेडिसिन अपडेट पर कार्यशाला में दी।
डा. त्रिपाठी ने कहा कि कुछ लोगों में सामान्य अवस्था में भी प्लेटलेट्स की संख्या कम देखी गयी है। इसको लेकर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। डॉ. एके त्रिपाठी ने कहा कि कुछ लोगों में प्लेटलेट्स का आकार बड़ा देखा गया है,जब कि प्लेटलेट्स के गुच्छे बन जाते हैं, जिन्हें ऑटोमैटिक मशीन रीड नहीं कर पाती है। ऐसे में प्लेटलेट्स काउंट कम होते हैं। अक्सर प्लेटकाउंट की संख्या देखकर मरीज परेशान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बुखार आने पर प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार से कम या फिर ब्लीडिंग होने पर सर्तक हो जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर ही प्लेटलेट्स चढ़ाना चाहिए। मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉ. कौसर उस्मान ने कहा कि यदि मरीज ठीक है आैर फिर भी उसका प्लेटलेट्स काउंट एक लाख से कम है, तो डॉक्टर से परामर्श लेनी चाहिए। उन्होंने बताया अक्सर लिवर की बीमारी शुरूआती दौर में पता नहीं चलती है। इस बीमारी के कारण भी प्लेटलेट्स घट जाता है।
पीजीआई नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने कहा कि ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी की बड़ा कारण है। किडनी में गड़बड़ी से शरीर में सूजन आ जाती है। समय पर इलाज से किडनी को खराब होने से बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि लोग देरी से अस्पताल डाक्टर से परामर्श लेने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में डायलिसिस या फिर किडनी प्रत्यारोपण ही विकल्प बचता है।
केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विश्वजीत सिंह ने कहा कि जब पेशाब करने में कॉफी के रंग में दिखे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। यह भी किडनी की गंभीर बीमारी का एक लक्षण है। उन्होंने कहा कि किडनी रोगियों में पेशाब कम होने लगती है। ऐसे में इलाज के साथ मरीज को खाने व पानी की मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए।












