इसमें है औषधीय गुणों का खजाना, पर हम फेंक देते है इसको

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न्यूज डेस्क।आम तौर बिना चोकर युक्त आटे का प्रयोग करते है। लोगों को खाने में चोकर पसंद नहीं आता है, जबकि चोकर पाचन के लिए औषधीय गुणों का खजाना है। इसमें विटमिन और पौष्टिक तत्व पाये जाते है ,जो घातक बीमारी कैंसर, आँतों की समस्या, आमाशय के घाव, क्षय रोग ,ह्मदय-रोग आदि कई आैर बीमारियों से सुरक्षा करने में सहायक है।
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं के चोकर में औषधीय गुण भरपूर होते हैं। चोकर निकाले हुए आटे की रोटियां स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। बाजार से पिसा हुआ बारीक मैदे की तरह आटे की रोटी खाना जितना सुस्वादिष्ट है, उतना ही आसान शरीर में रोगों का प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करना। गेहूं में मौजूद फाइबर (रेशा) आंतों की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इलाहाबाद के नैनी स्थित आरोज्ञ आश्रम एवं आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के आयुर्वेदाचार्य डा नरेन्द्रनाथ केसरवानी ने मीडिया से कहा कि बताया कि चोकर में अनेक विटमिन और पौष्टिक तत्व होते है जो शरीर के लिए लाभ दायक होते हैं। गेहूँ का चोकर क़ब दूर करने के लिए अद्वितीय औषधि है। इसके सेवन से आँतों में मरोड़ पैदा नहीं होती। उन्होंने बताया कि यह कैंसर, मधुमेह (शूगर), आँत, आमाशय, क्षय , ह्मदय-रोग, बैड कोलेस्टेरॉल, किड़नी, लीवर, गठिया, आदि रोगों से रक्षा करता है। गेहूँ का चोकर खानेवालों को एपेंडिसाइटिस , आँतो की बीमारी, अर्श (पाइल्स) भगंदर, बृहदान, एवं मलाशय का कैंसर का खतरा न के बराबर रहता है।

डॉ. केसरवानी ने बताया कि चोकर मधुमेह निवारण में भी सहायक होता है। इसके सेवन से दिल-दिमाग स्वस्थ रहता है, क्योंकि चोकर से पेट साफ हो जाता है। चोकर क्षारधर्मी होने के कारण रक्त में रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाता है और मोटापा घटाने के लिये निरापद औषधि है। पाचनतंा चोकर से स्वस्थ रहता है। कब्ज दूर करने और सहज लाभदायक है। इसके सेवन से पाचन संबंधी सभी गड़बड़ियों से निजात मिलती है।

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद को यदि पैथोलाजी से जोड़ कर उपचार किया जाए तो इसका शत प्रतिशत सकारात्मक परिणाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसंधान संस्थान को विकसित करने की आवश्यकता है। अनुसंधान के लिए नए केन्द्र खोले जाए। देशी और पाश्चात्य चिकित्सा पर मिलकर काम किया जाना चाहिए।

आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि हरिद्वार के गुरूगुल कांगड़ी के प्रोफेसर डा़ परासर ने आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के परस्पर सहयोग और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में एनसियन्ट पैथोलाजी के विभाग के विभागाध्यक्ष डा़ नगेन्द्र राय ने आंत और बात पुस्तक में चोकर के गुणो का वृहद वर्णन किया है।

आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि गेहूं के आटे का चोकर अन्त:श्रावी ग्रंथियों के नैसर्गिक क्रिया कलाप में मदद करता है। इसके सेवन से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, कब्ज , अपच आदि विकारों से छटकारा मिलता है। चोकर युक्त रोटियां खाने से पेप्टिक अल्सर नहीं होता। चोकर में मौजूद प्रोटीन पेप्टिक अल्सर से लोगों की सुरक्षा करता है तथा दातों और मसूढों को लाभ पहुंचाता है।

आज लोगों की पहली पसंद साफ-सुथरा और मैदे की तरह बारीक आटा है जो अनेक रोगों का कारक है। चोकर युक्त आटा खाने से बार बार होने वाला जुकाम, सिरदर्द, भूख की कमी, तथा दांतों से एनामेल हटना आदि का उपचार चोकर से हो सकता है।

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