आयुर्वेद रखे आपको बरसाती बीमारियों से दूर

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Photo Source: edc2.healthtap.com

लखनऊ –  लगातार कई महीने तक झुलसाने वाली सूर्य की तपस से राहत मिलने के दिन आ गए हैं क्योंकि मानसून आने से लगभग हर जगह बारिस का सिलसिला शुरू हो गया है।  यकीनन इससे हमारी बाॅडी और स्किन दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा सूर्य की तेज किरणें, सनबर्न, डिहाईड्रेशन की गंभीर समस्या से भी निजात मिलना तय है। बूंदा बादी और पानी की बौछार से हमारे शरीर को बहुत शीतलता मिलती है लेकिन शरीर के लिए इस अचानक हुए मौसमी परिवर्तन के कारण परेशानी शुरू होने लगती है। जिसकी वजह से लोग कई बीमारियों के ग्रस्त हो जाते हैं।

बरसात के मौसम में फूड और जल जनित बीमारियां जैसे टायफायड, गैस्ट्रोएन्टेरिटिसिस, फूड विषाक्तता, हेपेटाइटिस ए एंड ई और डायरिया में तेजी दिखाई देती है। स्थाई बारिश के पानी के कारण मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मामले भी बढ़ जाते हैं। मॉनसून सर्दी, फ्लू, और गले और छाती के संक्रमण जैसे वायरल के लिए जलद्वार खोल देता है। ऐसे में एहतियाती उपायों को अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है।

जीवा आयुर्वेदा केे निदेषक डाॅ प्रताप चैहान के अनुसार गर्मी के जाते ही बरसात का मौसम शुरु हो जाता है। बारीश के आगमन से लोगों को गर्मी से राहत तो मिलती है, परंतु साथ ही उन्हे स्वास्थय से जुड़ी कई बड़ी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। तापमान मे अचानक बदलाव के कारण हमारी रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है। जिससे हम बिमारीयो के चपेट मे जल्दी आते है। इस मौसम में बाहर का चटपटा खाना जितना अच्छा लगता है वह उतना ही नुकसानदेह भी होता है।

इन दिनों फिट रहने के लिए खाने की आदत पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मानसून में दूसरे मौसम की तुलना में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। पाचन तंत्र के कमजोर होने से हमारे शरीर का मेटाबोलिजम कम हो जाता है जो वजन बढ़ने का प्रमुख कारण होता है। इस वजह से पेट की बीमारियों के साथ दूसरी कई बीमारियां होने की प्रबल आशंका होती है।

जीवा आयुर्वेदा केे निदेषक डाॅ प्रताप चैहान के अनुसार ऐसे रख सकते है हम मानसून के दौरान अपने सेहत का ख्याल-

  • गहरे तेल में तला हुआ, जंक फूड, ज्यादा गर्म, खटृा और नमकीन भोजन को खाने से बचना चाहिए क्योकी बरसात के समय हमारी पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है।
  • मानसून में हलके और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ, पकी हुई या स्टीम सब्जियां, कददू, फल, मूंग दाल, खिचड़ी,काॅर्न, काबुली चने का आटा और ओटमील आदि खाने चाहिए। इसके अलावा कच्चे सलाद की जगह स्टीम सलाद लेना चाहिए।
  • मानसून में बहुत अधिक भारी, गर्म, खट्टे जैसे चटनी, अचार, मिर्ची, दही, करी आदि खाद्य पदार्थों को खाने से वाटर रिटेंशन, अपचन, एसीडिटी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए तले हुए पदार्थ, जंक फूड, मिर्च मसालों से भरपूर खानो से बचना चाहिए।
  • कसैला स्वाद पित्त को निष्प्रभावित करने में मदद करता है। इसलिए कड़वी सब्जियां जैसे करेला और कड़वी जड़ी-बूटियां जैसे नीम, सूखी मेथी और हल्दी अधिक खाएं। इसके अलावा ये सब चीजें आपको संक्रमण से बचाती हैं।
  • मानसून में गरम हरबल चाय पिना चाहिए क्योेकि ये जीवाणुरोधी होते है।
  • सब्जियो और फलो को अच्छे से धो कर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
  • मानसून के समय हमे पत्तेदार सब्जिया और सलाद खाने से बचना चाहिए क्योकि इस मौसम में बैक्टीरिया अधिक होते हैं जो हमको बिमार कर सकते है।
  • हप्ते मे कम से कम दो बार तिल के तेल से अपने शरीर की मालीश करना चाहिए ये बरसात के दौरान शारीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। जिन लोगो को तिल का तेल शूट नहीं करता उन्हे नारियल के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • बरसात के दौरान हमें ज्यादा मेहनत वाले व्ययाम जैसे दौड़ना, तेज सायकल चलाना, हाईकिंग से बचना चाहिए क्योकी ये भी पित ;गर्मीद्ध को बढ़ाने का काम करते है।
  • जब भी खाना खाए तब हमे इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो जगह साफ सूथरी हो। बरसात के दौरान ऐसा कुछ भी खाने से बचना चाहिए जो खुले में रखा हो और ठेले व खमुचे वालो से खाने से बचना चाहिए।
  • बरसात के दौरान हमे सरसो का तेल, फली का तेल, मक्खन और ऐसे तेल के उपयोग से बचना चाहिए जो शरीर को गरम करता है। इनके बदले हमे सनफलावर आयल, कार्न आयल, घी, ओलिव आयल का ही खाना बनाने में उपयोग करना चाहिए।
  • स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ मन निवास करता है। यह वही है जिस पर हम विश्वास करते हैं और अपने शरीर को देखभाल को लेकर आपको कभी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इसलिए स्वयं और अपने प्रियजनों को सुरक्षित और स्वस्थ रखें और सुंदर मौसम का आनंद लें।

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