लखनऊ। डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रविवार को इमरजेंसी में युवक को भर्ती करने पर एम्बुलेंस में ही मौत हो गयी। परिजन इमरजेंसी डाक्टरों ने एम्बुलेंस में युवक को प्राथमिक इलाज दिये जाने के लिए फरियाद करते रहे, लेकिन कोई डाक्टर नहीं आया। मौत से आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस पहुंची आैर परिजनों को समझा बुझा कर शांत किया। बेबस परिजन रोते बिलखते परिजन शव लेकर चले गए।
बहराइच निवासी 18 वर्षींय युवक को उसके परिजन पहले पास के अस्पताल ले गए। वहां पर सांस की दिक्कत होने पर हालत बिगड़ने पर परिजन युवक को एम्बुलेंस से लोहिया संस्थान की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। मरीज के परिजनों का आरोप है इमरजेंसी में जगह न होने की बात पर वह लोग डॉक्टरों से युवक को देखने के लिए कहते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुना। इमरजेंसी के डॉक्टर ने बताया कि मरीज गंभीर हालत में था आैर एम्बुलेंस में भी आक्सीजन सपोर्ट पर था। काफी देर बाद डॉक्टर देखने पहुंचे तो उसकी मौत हो चुकी थी। युवक की मौत से आक्रोशित परिजनों ने इलाज में देर व लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ने पर आसपास भीड़ एकत्र हो गयी। हंगामा की जानकारी मिलने पुलिस आ पहुंची। मौके पर पुलिस के काफी समझाने पर परिजन शांत हुए ।
लोहिया संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा. विक्रम सिंह का कहना है कि जिस वक्त यह बीमार युवक अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर इमरजेंसी में गंभीर एक बच्चे सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन) दे रहे थे। ऐसे में उसे छोड़ना ठीक नहीं था। सीपीआर देने के बाद डॉक्टर मरीज को एम्बुलेंस में देखने गए, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों के आरोप गलत हैं। डॉक्टरों की तरफ से कोई लापरवाही नहीं सामने आयी











