यहां प्रयोग हो रही नकली आैर खराब दवाएं

0
742

न्यूज डेस्क। लम्बे शोध के बाद वैज्ञानिकों ने दावा है कि मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी सहित दूसरी बीमारियों की नकली आैर खराब गुणवत्ता वाली दवाएं विकासशील देशों में धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही हैं। वैज्ञानिकों ने साथ ही कहा कि कम एवं मध्यम आय वाले देशों से नमूने के तौर पर ली गयी 13 दवाओं को लिया गया। इनमें से 13 प्रतिशत दवाएं खराब गुणवत्ता की थीं।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (यूएनसी) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पता चला कि अफ्रीका में इस्तेमाल में लायी जा रही 19 प्रतिशत जरूरी दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की थीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि कम आैर मध्यम आय वाले देशों में 19 प्रतिशत मलेरिया रोधी आैर 12 प्रतिशत एंटीबॉयोटिक दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की थीं।

यूएनसी में सहायक प्रोफेसर साचिको ओजावा ने कहा, ”खराब गुणवत्ता वाली या नकली दवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है क्योंकि ये दवाएं अप्रभावी या नुकसानदेह हो सकती हैं आैर बीमारी को लंबे समय के लिए खींच सकती है, विषाक्तता को जन्म दे सकती है या शरीर पर खतरनाक नकारात्मक असर डाल सकती हैं।”

यूएनसी के प्रोफेसर जेम्स हेरिंगटन ने कहा, ”हमें दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कानून लागू करने, गुणवत्ता नियंत्रण क्षमता बढाने आैर निगरानी एवं डेटा साझा संबंधी सुधार की जरूरत है।”

अब PayTM के जरिए भी द एम्पल न्यूज़ की मदद कर सकते हैं. मोबाइल नंबर 9140014727 पर पेटीएम करें.
द एम्पल न्यूज़ डॉट कॉम को छोटी-सी सहयोग राशि देकर इसके संचालन में मदद करें: Rs 200 > Rs 500 > Rs 1000 > Rs 2000 > Rs 5000 > Rs 10000.

Previous articleइंदौर में लहरा 12 कि.मी. लम्बा तिरंगा, रिकार्ड
Next articleयहां दूसरे दिन भी रेजीडेंट डाक्टरों का बहिष्कार जारी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here