लखनऊ। गोमतीनगर में थाने के समीप स्थित निजी अस्पताल पर मरीज से सर्जरी के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने करने के बाद लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। उनका आरोप है कि मरीज को ठीक बताकर डिस्चार्ज तो कर दिया। शुक्रवार को हालत बिगड़ने पर परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए । जहां पर इलाज में कोई लाभ नही हुआ। यहीं शुक्रवार दोपहर अचानक युवक की हालत बिगड़ने पर तीमारदार उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर आए। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। नाराज तीमारदारों ने निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। यही नही लापरवाही की शिकायत सीएम व स्वास्थ्य विभाग से करने का दावा किया है।
जानकारी के अनुसार ठाकुरगंज बालागंज निवासी सुशील श्रीवास्तव का बेटा आयुष (21) की रीढ की हड्डी में टयूमर था। परिजनों का आरोप है कि जून महीन में गोमतीनगर थाने पास स्थित एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने जांच की तो पता चला कि मरीज की रीढ की हड्डी में ट्यूमर था। परिजनों का आरोप है कि 26 जून को डॉक्टर ने सर्जरी करने से पहले करीब साढ़े चार लाख रुपए जमा कर लिए। सर्जरी के बाद लगभग पंद्रह दिन मरीज अस्पताल में भर्ती रहा। यहां अस्पताल प्रबंधन ने क्लीनिकल चार्ज के रूप में करीब डेढ़ लाख का बिल दिया आैर डिस्चार्ज कर दिया।
कुछ दिन घर में रहने के बाद उसकी फिर हालत बिगड़ने पर आठ अगस्त को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर डॉक्टरों ने एक दो इलाज किया आैर फिर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे मरीज को अचानक तेज दर्द होने लगा आैर तड़प कर बेहोश हो गया। तीमारदार आनन-फानन में निजी वाहन से आनन फानन में उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर लेकर आए। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पिता सुशील का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज के नाम लाखों रु पये ले लिए आैर सही इलाज भी नहीं किया गया।
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