लखनऊ। वेतन विसंगति जैसे कई मुद्दों को लेकर बलरामपुर अस्पताल में शनिवार को चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी के पदाधिकारियों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता संविदा एवं कांट्रेक्ट बेस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आशीष कुमार राय ने की। उन्होंने कहा कि चिकित्सालय में बड़ी संख्या में कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं, लेकिन उनके मानदेय में बहुत विसंगितियां है। एक काम एक पैसा का नियम लागू नहीं है। नियमित कर्मचारी को 20 से 25 हजार रुपये मानदेय मिलता है, वहीं ठेकाकर्मियों को सिर्फ 52 सौ से सात हजार रुपये ही मिलते हैं।
जब मानदेय मिलता है तो पीएफ काटने की बात कही जाती है लेकिन तीन ठेका कम्पनियां बदल चुकी हैं लेकिन एक बार भी कर्मचारियों को पीएफ नहीं मिला है। इमरजेंसी सेवा में भी ठेके पर काम कर रहे हैं कर्मचारियों को भारत सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम वेतन से भी कम दिया जा रहा है और यह मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार चिकित्सालय से जुड़े हुए कर्मचारियों का वेतन सीधे विभाग से करें ताकि उनके श्रम का शोषण रोका जा सके। कर्मचारी नेता एसएल वाल्मीकि ने बताया कि ठेके पर काम कर रहा है कर्मचारी को 1 दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती है और अगर तबीयत खराब हो जाए तो उसको छुट्टी लेने पर उसका वेतन कट जाता है अतः सरकार से मांग है कि कम से कम महीने में दो छुट्टियां ठेके पर काम कर रहे हैं व्यक्ति को भी मिलनी चाहिए और संगठन निम्न पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर मांग की जाएगी कर्मचारियों की वेतन विसंगति सहित अन्य सेवाओं को श्रम अधिनियम के लागू जरूर लागू किया जाए।
उन्होंने बताया कि बलरामपुर अस्पताल में करीब 80 गार्ड आैर इतने ही सफाई कर्मचारी हैं। तीन ठेका कम्पनी बदल चुकी हैं लेकिन अभी तक पीएफ का भुगतान नहीं हो पाया है जबकि तीनों कम्पनियों ने पीएफ का पैसा मानदेय देते समय काटा था। यदि वेतन विसंगति बन रहती है तो चिकित्सा क्षेत्र में बेहतर गुणवत्ता पूर्ण सेवा देना कठिन होगा। चतुर्थश्रेणी कर्मचारी संगठन के प्रदेश के अध्यक्ष महेंद्र कुमार पाण्डेय, महामंत्री कृष्ण गोस्वामी और अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में रानी लक्ष्मीबाई लोकबंधु और ठाकुरगंज अस्पताल और द्यड अस्पताल के भी कर्मचारी उपस्थित रहें।