लखनऊ। नाम बड़े आैर दर्शन छोटे…. वाली कहावत संजय गांधी पीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर पर खरी उतर रही है। यहां पर विशेषज्ञ डाक्टरों की फौज ने घायल 18 वर्षीय आयुषी को हाथ तक नहीं लगाया। गेट के बाहर से ही के जीएमयू के ट्रामा सेंटर जाओ कहकर लौटा दिया। वहां पहुचने से पहले ही आयुषी की मौत हो गयी। अमेठी से हायर सेंटर के रेफर आयुषी के पिता एंबूलेंस से लेकर पीजीआई एपेक्स ट्रामा सेंटर शाम आठ बजे के आस -पास पहुंचे, लेकिन वहां पर तैनात
डाक्टर ने बिना हाथ लगाए ही रिफर कर दिया परिजनों का कहना है कि भर्ती करके स्टेबिल कर दिए होते शायद मेरे बिटिया की जिंदगी बच जाती।
अमेठी के ग्राम दरखा के रहने वाले अमिताभ मिश्र के बेटा और बेटी शहर में कोचिंग केलिए जाते है। पढ कर वह घर लौट रही थे कि रास्ते में बाइक सवार ने ठोकर मार दिया, जिससे आयुषी के चोट लग गयी। घर वाले तुरंत उसे लेकर संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल अमेठी गए, जहां से हायर सेंटर भेज दिया गया । आयुषी की बूआ सुधा मिश्रा लखनऊ से है, वह इस दौरान यहां आयी हुई है।
सलाह दिया कि सीधे पीजीआई एपेक्स ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे, क्योंकि वह उनके रोड पर ही है। यह लोग आयुषी को लेकर यहां पहुंचे। परिजनों का कहना है कि हाथ तक नहीं लगाया कहा कि हम मैनेज नहीं कर पाएंगे, जबकि ट्रामा
सेंटर में 20 डाक्टरों की पूरी टीम है। गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू है । परिजनों का कहना है कि भर्ती कर उपचार शुरू करते बाकी जो ई वर तय किए है उसे कौन रोक सकता है।
घायल होने के आठ घंटे तक आयुषी के परिजन लेकर अस्पताल .दर अस्पताल भटकते रहे लेकिन हर कोई कुछ करने को तैयार नहीं हुअ। संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के लोग ही यदि स्टेबिल करने के बाद हायर सेंटर रिफर करते तो शायद बच जाती।
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