लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग के कुछ जिम्मेदार लोग अपनी खास निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रत्येक स्तर पर कोशिश में जुटा है। बतौर उदाहरण देखा जाए तो बलरामपुर अस्पताल की कंडम सिटी स्कैन मशीन पर लाखों रुपए खर्च हो गये, जबकि लाखों रुपए की अभी उधार बाकी है। पहले बलरामपुर अस्पताल से मशीन को उखाड़कर सिविल अस्पताल भेजा, लेकिन मशीन इंस्टाल होने बाद वह नहीं चली। सीटी स्कैन मशीन में साढ़े तीन लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। वहीं अब अन्य उपकरणों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए आैर भुगतान की तैयारी में है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में उपकरणों की मरम्मत का ठेका एक निजी कंपनी को दे रखा है। यह अस्पतालों में खराब होने वाले उपकरणों को ठीक करती है। इसका भुगतान स्वास्थ्य विभाग करता है। इस कंपनी ने बलरामपुर अस्पताल में दस साल पुरानी लगी मशीन को उखाड़कर सिविल अस्पताल में लगाया था। इसमें करीब साढ़े तीन लाख रुपए खर्च होने का दावा कंपनी ने किया था। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कमीशन के खेल में कंपनी को भुगतान भी कर दिया। फिर भी यह मशीन नहीं चली। कंपनी ने मशीन को कंडम घोषित कर दिया। जबकि इससे पहले बलरामपुर अस्पताल में मशीन चल रही थी।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने पहले कंडम मशीन पर साढ़े तीन लाख रुपए फूंक दिए। कंपनी को गलत तरीके से भुगतान भी कर दिया गया। इस प्रकरण में शिकायत हुई वहीं मशीन का मिटनेंस का काम देखने वाली पूर्व कंपनी लाखों रुपए बकाया होने का दावा कर रही है। पूर्व में मिटनेंस का काम देखने वाली कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि जो कंपनी मशीन को उखाड़कर ले गई थी। उसकी गड़बड़ी से मशीन में खराबी हुई थी।
बलरामपुर अस्पताल के डा. राजीव लोचन ने कहना है कि अस्पताल में हमारी तैनाती होने से पहले निजी कंपनी ने मशीन को इस्टॉल करा दिया था। कई माह बीतने बाद भी निजी कंपनी मशीन को चला नहीं पाई। जिसके बाद मशीन को कंडम घोषित कर दिया गया।
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