ट्यूमर का इलाज बायोप्सी से होता है सटीक

0
1007
17-2-lko.gomtinagar sahara sahar aditoriam me ayojit karykram ko sambodhit karti prof.janice holton

लखनऊ। गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तथा सहारा हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में देश की न्यूरोपैथोलॉजी सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन एनपीसाइकॉन-2018 में देश- विदेश के विशेषज्ञों ने शनिवार को सहारा शहर के आडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में ब्रोनट¬ूमर, मिर्गी तथा मस्तिष्क बीमारियों की जांच व इलाज की नयी तकनीक व शोध कार्यो की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने एक मत से कहा कि डाक्टरों को नयी तकनीक व क्लीनिकल अपडेट से अवगत रहना चाहिए, ताकि मरीज को सही समय पर सटीक इलाज मिल सके । सम्मेलन का उद्घाटन शाम को किया गया ।

सम्मेलन में त्रिवेंद्रम के श्री चित्रा तिरु वल मेडिकल साइंसेज के वरिष्ठ डा. वी वी राधाकृष्णन ने बताया कि न्यूरोपैथालॉजी क्लीनिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान बनता जा रहा है। इसमें ट¬ूमर मस्तिष्क में या शरीर में कही भी हो। उसकी नयी तकनीक से जांच आवश्यक होती है। बायोप्सी से पता चल जाता है कि ट¬ूमर का इलाज कब आैर कैसे किया जाएगा। कीमोथेरेपी की आवश्यकता है या सर्जरी करके निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में क्रायोस्टेड तकनीक जांच से दस मिनट में बायोप्सी करके ट¬ूमर के प्रकार व इलाज विशेषज्ञ तय कर देते है। 2016 में नये तरीके से जांच का वर्गीकरण किया गया। इसके तहत ट¬मूर की जेनेटिक्स व हिस्टोलॉजी बता दी जाती है।

लोंिहया संस्थान की पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष व कैंसर विशेषज्ञ प्रो. नुजहत हुसैन ने बताया कि ब्रोन ट¬ूमर में नयी गाइडलाइन के मुताबिक करायी गयी बायोप्सी से सही इलाज सम्भव होता है। उन्होंने बताया कि लोगों में इस बात का ज्यादा भ्रम होता है कि बायोप्सी के बाद कैंसर फैल सकता है जो कि गलत है। इससे जांच के बाद ही पता चलता है कि ट¬ूमर कैंसर है कि नही।

चंडीगढ़ पीजीआई के वरिष्ठ डा. बीडी राडोत्रा ने बताया कि लंग (फेफड़ा) ट्यूबरकोलिसिस से ब्रोन में ट्यूबरकोलिसिस होने की आशंका ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि ब्रोन में टीबी होने पर इलाज कठिन हो जाता है, कुछ विशेष प्रकार की दवाओं से विशेषज्ञ की देखरेख में इलाज कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि ब्रोन टीबी संक्रमण फैलने की ज्यादा आशंका बन जाती है।

वरिष्ठ डा. ए के बनर्जी ने बताया कि ब्रोन स्ट्रोक से मौत का बड़ा कारण बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज, तनाव, मोटापा, अल्कोहल भी ब्रोन स्ट्रोक का बड़ा कारण बनता है। यह बीमारी युवा वर्ग में ज्यादा देखने को मिल रही है। इसके लिए ब्लड प्रेशर की जांच व इलाज कराना चाहिए। इसके अलावा खान-पान का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने अल्जाइमर बीमारी के बारे में कहा कि यह बीमारी 60 वर्ष के बाद ज्यादा लोगों में देखने को मिलती है हालांकि इस उम्र में बीमारी के कारणों पर शोध किया जा रहा है।

लंदन से आयी मारिया थाम ने बताया कि मिर्गी को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम होते है, जबकि समय सही इलाज किया जाए तो यह ठीक हो सकती है। उन्होंने बताया कि जांच के बाद मिर्गी की पुष्टि होने पर इलाज किया जाता है अगर मिर्गी ठीक नही हो रही है तो इसकी सर्जरी की जा सकती है। लगभग बीस से तीस प्रतिशत मरीजों में ही सर्जरी की जाती है, लेकिन अब कुछ नयी दवाएं आ गयी है। इन दवाओं के प्रयोग के बाद ही सर्जरी करनी चाहिए।


अब PayTM के जरिए भी द एम्पल न्यूज़ की मदद कर सकते हैं. मोबाइल नंबर 9140014727 पर पेटीएम करें.
द एम्पल न्यूज़ डॉट कॉम को छोटी-सी सहयोग राशि देकर इसके संचालन में मदद करें: Rs 200 > Rs 500 > Rs 1000 > Rs 2000 > Rs 5000 > Rs 10000.

Previous articleप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगे कैंसर यूनिट
Next articleशरीर में लगातार गांठ दिखे तो करें यह

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here