ट्रामा सेंटर में भर्ती प्रक्रिया गंभीर मरीजों की जान पर बनी

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर में मरीजों को भर्ती कराकर इलाज कराना जटिल हो गया है। मरीजों की भर्ती से लेकर जांच प्रक्रिया को टेढी खीर बना दिया गया है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान पर बन जाती है। उधर नवनियुक्ति कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने शनिवार को ट्रामा सेंटर का निरीक्षण किया आैर मरीजों की समस्या का निराकरण भी किया।

ट्रामा सेंटर में मरीजों की भर्ती के लिए अचानक नयी व्यवस्था कर दी गयी है यह व्यवस्था से भर्ती होने से पहले ही मरीज हलकान हो जाता है। उसे भर्ती प्रक्रिया से लेकर जांच शुल्क जमा करने व कराने के लिए लगभग एक घंटा से ज्यादा का वक्त लग जाता है। ऐस में इमरजेंसी में इलाज की उम्मीद लिए मरीज बेहाल हो जाता है। मरीज भर्ती होने के लिए कैजुअल्टी में पहुंचता है तो उसकी बीमारी व चोट के मुताबिक सम्बधित विभाग भेज दिया जाता है। विभाग में पहुंचने पर वहां का डाक्टर मरीज की जांच करके जांच कराने के लिए भेजता है आैर भर्ती पंजीकरण कराने के निर्देश देता है। इसके बाद मरीज का तीमारदार पहले ओपीडी पंजीकरण के लिए लाइन लगाता है। इसके बाद एक रुपये के पर्चे के लिए लाइन में खडा होता है। यहां की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जांच कराने के लिए काउंटर पर पहुंचता है तो शुल्क जमा करने का निर्देश होता है। शुल्क जमा करने के बाद वह मोहर लगवाता है आैर उसे जांच कराने का वेंटिग मिलता है। इस प्रक्रिया को पूरी करने के लिए अलग- अलग काउंटर पर लाइन लगाना पड़ता है आैर मरीज बेहाल हो जाता है।

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निजी क्षेत्र के काउंटर होने के कारण वहा भी मनमानी होती है आैर तीमारदार आक्रोशित हो जाता है। हालांकि केजीएमयू के नवनियुक्त कुलपति डा. एम एल भी भट्ट ने ट्रामा सेंटर का निरीक्षण किया। मरीजों से बातचीत की गयी आैर मरीजों के उपचार में देरी का निदान कराने का निर्देश भी दिया लेकिन वहां पर मौजूद अधिकारियों ने मरीजों की भर्ती की इस जटिल प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी। हालांकि सेंटर प्रभारी का दावा है कि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया में सिंगल विडो करने का प्रस्ताव है।

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