लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार ट्रामा सेंटर की चिकित्सा व्यवस्था के चरमराने का कारण मरीजों की लगातार बढ़ती भीड़ को बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है, जबकि ट्रामा सेंटर के लिए तैनात किये गये दो दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ डाक्टरों की तैनाती ही नहीं कर पा रहा है। शतप्रतिशत रेजीडेंट व जूनियर डाक्टरों के भरोसे चल रही चिकित्सा व्यवस्था में मरीजों की इलाज प्रभावित हो रहा है।
ट्रामा सेंटर में लखनऊ हीं नहीं आस-पास जनपदों के मरीजों का इलाज करने का दबाव बना रहता है। बढ़ते मरीजों से इलाज के लिए बनती जा रही परेशानी को केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट बयां करते रहते है, लेकिन उनकी उदासीनता के कारण ट्रामा सेंटर के लिए तैनात कि ये गये विभिन्न विभागों के डाक्टरों ही गायब है। यह वरिष्ठ डाक्टर केजीएमयू प्रशासन की लापरवाही के चलते ही धीरे- धीरे अपने – अपने विभागों में वापस हो गये। क्योंकि वहां पर मरीजों का तत्काल इलाज करने का लोड कम रहता है। सेंटर में बहुत कम ही विभाग है जहां पर वरिष्ठ डाक्टर दिन तो क्या रात में ड्यूटी पर रहता हो। कुछ दिन पहले ट्रामा सेंटर के लिए ही तैनात कि ये गये वरिष्ठ डाक्टरों को लाने की कोशिश की गयी, लेकिन कुलपति प्रो. एमएलबी भट् की उदासीनता के चलते लटकी हुई है।
वरिष्ठ डाक्टर ही नहीं यहां पर जूनियर डाक्टरों की भी तैनाती की गयी थी। वह भी अपने वरिष्ठों के नक्शे कदम पर वापस अपने विभागों में चले गये। कुछ अर्सा पहले ट्रामा सेंटर के फैकल्टी प्रभारी बनाये गये डा. सुरेश कुमार ने पहले चरण में जूनियर डाक्टरों को वापस लाने का प्रयास तो शुरू किया, लेकिन अभी अमली जामा नहीं पहन पाया है। कहने को ट्रामा सेंटर में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक से लेकर पदाधिकारियों की लिस्ट बनी है, परन्तु दिन में सिर्फ ट्रामा सेंटर प्रवक्ता डा. संदीप तिवारी ही अपने विभाग में मिलते है। बताते है कि शेष जिम्मेदारी अधिकारी सुबह सिर्फ फाइलों में हस्ताक्षर करके राउंड करके चले जाते है।
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