लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में टूटे दांत लगवाने के लिए तीन से छह महीनें डाक्टर के यहां इलाज के लिए परिक्रमा नहीं करनी पड़ेगी। एक दिन में नकली दांतों का तत्काल प्रत्यारोपण किया जा सकेगा।
केजीएमयू दंत संकाय डॉ कमलेश्वर सिंह और डॉ पूरन चंद ने तत्काल प्रत्यारोपण रोगियों में शोध के लिए दूसरा पुरस्कार जीता है । डेंटल एक्सपर्ट डाक्टर्स ने अब तक 60 मरीजों पर रिसर्च किया है। इसके तहत मरीजों को तुरंत दांत लगाया गया, जो कि सफल रहा है।
बृहस्पतिवार को केजीएमयू कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने डेंटल यूनिट के इन डाक्टर्स को सम्मानित किया है।
डेंटल यूनिट के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के डॉ. कमलेश्वर सिंह ने बताया कि एक्सीडेंट में कई बार घायल के दांत टूट जाते हैं, उन्होंने बताया कि अभी तक टूटे दांतों के स्थान पर नकली दांत लगाने में लगभग छह महीने का समय लग जाता था। कई चरणों में सर्जरी होने के कारण मरीज को दर्द भी सहना पड़ता था। अब तुरंत नकली दांत लगाना आसान हो गया है। इसमें घायल के जबड़े की हड्डी बीएमडी (बोन मैरो डिंसिटी) की जांच करते हैं। फिर सर्जरी कर नकली दांत प्रत्यारोपण कर देते हैं।
डॉ. कमलेश्वर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से दो वर्षों के लिए शोध अनुदान मिला है। अध्ययन में तीन से छह महीने के इलाज के समय को घटाकर एक दिन कर दिया गया है। यह सर्जरी की संख्या, खर्च आैर मरीज के बेहतर इलाज को प्रदर्शित करता है। शोध में डॉ. अनुपम पाठक ने भी सहयोग किया। इस अध्ययन को पबमेड इंडेक्सिंग के साथ इंडियन प्रोस्थोडॉन्टिक्स सोसाइटी के प्रतिष्ठित जनरल में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है। डेंटल यूनिट के डा. कमलेश्वर सिंह, पूरन चंद, अखिलानंद चौरसिया, नीति सोलंकी, अनुपमा पाठक ने शोध किया है।
केजीएमयू संकाय डॉ कमलेश्वर सिंह और डॉ पूरन चंद ने तत्काल प्रत्यारोपण रोगियों में शोध के लिए दूसरा पुरस्कार जीता।











