टीबी खतरनाक, जानलेवा लेकिन लाइलाज नहीं -गोष्ठी

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लखनऊ । वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्ति बनाने के लिए चल रहे कार्यक्रम के लिए सबको एकजुट होना पड़ेगा, क्योंकि जिस तरह के हालात चल रहे हैं, उससे लक्ष्य को पाना कठिन काफी कठिन है। यह बात किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पाइरेटरी विभाग के अध्यक्ष डा. सूर्यकांत ने सोमवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित गोष्ठी कही। पार्टनरशिप फॉर टीबी केयर एण्ड कंट्रोल संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत में दुनिया के एक चौथाई मामले पाये गये। टीबी से मरने वाला हर पांचवा व्यक्ति भारतीय होता है।

उन्होंने बताया कि भारत द्वारा टीबी को समाप्त नहीं कर पाने के कई कारण है, जैसे कि टीबी का जीवाणु कई वर्षों तक व्यक्ति के अन्दर निष्क्रिय अवस्था में बिना किसी लक्षण के रह सकता है तथा अनुकूल परिस्थिति आने पर यह पुन: सक्रिय होकर बीमारी को पैदा करता है। अनुकूल परिस्थिति को बढ़ावा देते हैं उनमें प्रमुख है- कुपोषण, एचआईवी, मधुमेह, महिलाओं में कम उम्र में गर्भधारण और बार-बार गर्भधारण, परदाप्रथा, गरीबी, भीड़, धूम्रपान तथा अन्य नशे, साफ-सफाई की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ न ले पाना, अनियमित दवा लेना आदि।

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