लखनऊ। टीबी पूरी तरह से ठीक हो सकती है, बशर्ते समय पर पहचान कर इलाज शुरू किया जाए। इस बीमारी के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज व जांच की सुविधा पूरी तरह से मुफ्त है। इसके अलावा मरीजों को 500 रुपये पोषण भत्ता हर महीने दिया जा रहा है। यह जानकारी केजीएमयू कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने
मंगलवार को पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कही।
कुलपति डॉ. पुरी ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए समय पर मरीजों की पहचान जरूरी है, क्योंकि टीबी मरीज की समय पर पहचान न होने से संक्रमण का खतरा बढ जाता है। मरीज के संपर्क में आने वालों को आसानी से टीबी हो सकती है।
केजीएमयू पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि अगर दो हफ्ते से अधिक खांसी, बुखार, वजन में कमी समेत दूसरे लक्षण नजर आने पर तुरंत विशेषज्ञ डाक्टर के पास जाना चाहिए। यह टीबी के लक्षण भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जांच में टीबी की पुष्टि होने पर पूरा इलाज कराना चाहिए। बीच में इलाज छोड़ना जानलेवा हो सकता है। मरीज में दवाओं का रजिस्टेंट पैदा हो जाता है। नतीजतन टीबी की सामान्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। नतीजतन मरीज मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी की चपेट में आ जाता है। इसका इलाज एक से लगभग दो साल तक चलता है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग टीबी मरीजों को गोद लें। उन्हें दवा और पोषण की सुविधा मुहैया कराएं। इससे टीबी हारेगी। केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि जागरूकता से टीबी को खत्म किया जा सकता है












