लखनऊ। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण कार्यक्रम, स्कूलों चलो अभियान में लगाये गये परिमिट वाले टैक्सी वाहन किराये पर संचालन में पचास लाख 45 हजार रुपये के घोटाला पकड़ा गया है। डाक्टरों को वाहनों बच्चों का हेल्थ परीक्षण के नाम पर वाहन घोटाले में दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। अलीगढ में हुए इस घोटाले में वाहनों में स्कूटी व मोटर साइकिल के नम्बरों को प्रयोग किया गया था।
बताते चले कि परिवार कल्याण, मातृ शिशु कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि प्रदेश में बच्चों के स्कूलों एवं आंगनबाडी केन्द्रों में टीकाकरण बच्चों का परीक्षण कर दवा आदि वितरण के लिए परमिट वाले टैक्सी वाहन किराये पर प्रयोग किये जा रहे है। इन वाहनों से डाक्टरों की टीम को गांवों में भेजने के लिए बजट का आवंटन किया गया था। इस योजना के तहत पाया गया कि प्रदेश के काफी जनपदों में डाक्टरों की टीम कही नही गयी आैर टैक्सी वाहनों का प्रयोग भी नहीं किया।
जांच में स्कूटी नम्बर पर चल रही थी किराये की टैक्सी –
गड़बड़ी की जांच में पता चला कि टैक्सी वाहन के नम्बर दर्ज किये गये थे वह स्कूटी या दो पहिया वाहनों के नम्बर पाये गये। इस शिकायत पर प्रमुख सचिव ने जांच के आदेश दे दिये आैर प्राथमिक जांच में ही अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारी को दोषी पाये गये है। कैबिनेट मंत्री रविदास ने बताया कि प्रमुख सचिव ने अलीगढ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारी को जांच में दोषी माना है यह भी स्पष्ट किया कि मोबाइल हेल्थ टीम, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण हेतु परमिट टैक्सी के संचालन में वित्तीय अनियमितता पकड़ी गयी है।
प्राथमिक जांच में वाहन घोटाला लगभग पचास लाख पैतालिस हजार छह सौ पचास रुपये का पकड़ा गया है। अब इस प्रकरण में दोषियों से गबन की गयी सम्पूर्ण राशि की वसूली तथा निलम्बन के साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिये है। बताया जाता है कि इस कार्रवाई के बाद अन्य जनपदों के सीएमओ पर कार्रवाई की जा सकती है।