लखनऊ। डिपार्टमेंट ऑफ पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा श्वांस रोगियो, वरिष्ठ नागरिकांे, बच्चों एंव गर्भवती महिलाओं को जागरुक करने के लिये दीपावली के अवसर पर, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और मिलावटी खाद्य पदार्थ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव एवं उनसे बचाव की जानकारी दी। विभाग प्रमुख डा. वेद प्रकाश ने बताया कि वायु प्रदूषण पूरे विश्व की समस्या बन गयी है। प्रत्येक 10 में से 9 लोग प्रदूषित वायु में रह रहे हैं। हर साल लगभग 70 लाख लोगों की मृत्यु वायुप्रदूषण की वजह से होती है।
बदलते हुए मौसम, वायु प्रदूषण, मिलावटी खानें एवं बढ़े हुए पराग कणों के कारण दिवाली के समय अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ जाती है। प्रायः यह देखा गया है कि पटाखों से उठनें वाले धुएं से अस्थमा, एलर्जी एवं सीओपीडी के मरीजों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। दमा और सीओपीडी बीमारियों से पीडित मरीजों में सांस फूलना, छाती में जकड़न, खांसी एवं सींटी बजना जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं। डा.वेद ने बताया कि सीओपीडी एक्शन प्लान एक गाइड है।
जिसका पालन आपके लक्षण बदतर हो जाने पर किया जाता हैं। सामान्य अवधि के दौरान, जब कोई लक्षण बढ जाते है तब भी अपनी चिकित्सा द्वारा सलाह के अनुसार, दवा का उपयोग करना जारी रखें। यदि आपके लक्षण दिन-प्रतिदिन के सामान्य से बदतर हो जाते हैं अपने डॉक्टर से संपर्क करें या अपने नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा केंद्र पर जाएं। यदि लक्षण अचानक बहुत खराब हो जाते है और आपको सांस की तकलीफ हो जाती है, तो 108 पर कॉल करें या तुरन्त आपातकालीन सहायता प्राप्त करें।
क्या सावधानियाँ बरतें…
- श्वास के मरीजों को पटाखों एवं धुएं से दूर रहना चाहिए।
- घर के बाहर व्यायाम करने कि बजाए घर के अन्दर करें।
- गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों को घर के अन्दर रखें।
- खिड़की दरवाजे बन्द रखें।
- घर के बाहर जाना जरूरी हो तो मुंह पे मास्क या रूमाल बाधें, आंखों पर चश्मा लगायें और खुलें में ज्यादा देर तक काम करने से बचे।
- दवाइयां और इन्हेलर समय से इस्तेमाल करेंं।
- डॉक्टर द्वारा अस्थमा एक्शन प्लान के बारे में जाने ।
- ताजे फल सब्जियां और घर में बनी मिठाइयों का इस्तेमाल करें।
- स्वास्थ्य बिगडनें पर अपने चिकित्सक से मदद लें।
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