लखनऊ। देर से शादी व शिशुओं को स्तनपान न कराने के स्तन कैंसर बढ़ रहा है। स्तन में गांठ होने पर जांच में प्रमुख रूप से जेनेटिक जांच भी करायी जानी चाहिए। अगर आंकड़ों को देखा जाए, तो कुल कैंसर के मामलों में 27 प्रतिशत स्तन कैंसर के ही पाये गये है। यह जानकारी दिल्ली के सफदरगंज हास्पिटल के डा. ए के मंडल ने पैथालॉजी विभाग के सहयोग से पैथकॉन 2017 में दी। तीन दिवसीय कार्यशाला में दूसरे दिन अन्य विशेषज्ञों ने किडनी, प्रोस्टेट सहित अन्य जांचों में नयी तकनीक की जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्घाटन केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने किया।
कार्यशाला में डा. मंडल ने बताया कि आधुनिक जीवन शैली के साथ शादी में देरी होने के अलावा शिशुओं को स्तन पान न कराने से स्तन कैंसर बढ रहा है। उन्होंने बताया कि अगर किसी भी तरह से गांठ हो तो नयी तकनीक से बायोप्सी कराने के अलावा जेनेटिक जांच भी करानी चाहिए। जांच के बाद हारमोनल थेरेपी की भी दी जानी चाहिए। इससे समय पर इलाज कराने से दोबारा कैंसर की संभावना लगभग न के बराबर रहती है। केजीएमयू के वरिष्ठ डा. सुरेश बाबू ने कहा कि कम उम्र की महिलाओं में गुर्दा फेल होने की ज्यादा पाये जा रहे है।
अगर कारणों को देख जाए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पानी कम पीती है। ताकि उन्हें शौचालयन कम जाना पड़े। लोहिया संस्थान के डा. पद्म सिंह ने बताया कि सारकोमा नाम का ट¬ूमर बढ़ रहा है। इसकी पहचान मुश्किल होती है। यह ट¬ूमर किसी भी हो सकता है। इसकी जांच के लिए इम्यूनों हिस्टो केमिस्ट्री सहित कई अन्य जांच भी है। पीजीआई के डा. मनोज जैन ने कहा कि कैंसर की जांच के लिए नयी उपकरण आ गये है। उन्होंने बताया कि नयी तकनीक से जांच कराने में बीमारी की गहना से जांच हो जाती है। लोहिया संस्थान की वरिष्ठ डा. नुजहत ने बताया कि ओरल कैंसर के मामले काफी बढ रहे है। इसमें नयी जांच भी आ गयी है। इस तकनीक से जंाच कराना आसान होगा।












