लखनऊ । किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के समस्त एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स ने कुलपति,मुख्य चिकित्सा अधिक्षक, कुल सचिव, कुलानुशासक एवम महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवम प्रशिक्षण प्रदेश को ज्ञापन सौंपा है। इंटर्न डॉक्टर्स का कहना है कि एमबीबीएस एवम बीडीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में पिछले 10 सालों से कोई वृद्धि नही हुई है, पिछले 10 सालों में महंगाई में कई गुना बढ़ोतरी हुई, पर हमारा स्टाइपेंड 7500 ₹ प्रति माह पर अभी भी बना हुआ है। हम इंटर्न इस कोविड महामारी के दौर में भी पूरी निष्ठाभाव से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।
हम लगातार 8 से 12 घंटे जहां भी जरूरत हो जैसे कोरोना ट्रायज एरिया, फ्लू ओ पी डी, इमरजेंसी, कोरोना होल्डिंग एरिया और सभी विभागों इत्यादि, जहाँ पर की संक्रमण के सबसे ज्यादा रिस्क हैं, बिना किसी झिझक के भी अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं और बदले में सरकार हमे 250 ₹ प्रतिदिन देती है, जो कि दैनिक मजदूर को मिलने वाली धनराशि से भी कही कम है। एक तरफ सरकार हमें कोरोना वारियर कहती है और दूसरी तरफ इन्ही वारियर के साथ इस तरह का अन्याय हो रहा है।
इंटर्न डॉक्टर्स का कहना है कि पूर्व में भी अपना ज्ञापन सरकार में ऑफिशियल लेटर के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेज कर अवगत कराया था कि हमारा स्टाइपेंड केन्द्रीय चिकित्सा संस्थानों और दूसरे राज्यों के चिकित्सा संस्थानों की तुलना में काफी कम है। केन्द्रीय चिकित्सा संस्थानों में जहां इसी कार्य अवधि के 23,500 ₹ दिए जाते हैं, तो वही दूसरे राज्यों में भी 30,000 ₹ तक कि धनराशि दिए जा रहे है।
सरकार की तरफ से लगातार उपेक्षित होने के बाद हमे मजबूरन यह कदम उठाना पड़ रहा है। चिकित्सा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए हमारे मांगों पर अतिशीघ्र ध्यान दिया जाए और हमारी स्टाइपेंड केन्द्रीय चिकित्सा विश्वविद्यालय के बराबर किया जाए। अन्यथा प्रदेश के समस्त इंटर्न डाक्टर कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होंगे।












