स्पेशल टीम को मिले 72 घंटे पूरे होने के बाद भी मौत की गुत्थी नहीं सुलझी, पुलिस के हाथ खाली

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लखनऊ । राजधानी में बीते मंगलवार को कर्नाटक कैडर के आईएएस का शव संदिग्ध हालात में सड़क पर मिला जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पेशल टीम बनाकर जांच रिपोर्ट 72 घंटे में शौपने का आदेश जारी किया था। जिसकी मियाद रविवार को समाप्त हो गयी। इसके बावजूद पुलिस अब भी खाली हाथ है। वहीं मृतक अनुराग के साथ वीआईपी अतिथि गृह में ठहरे एलडीए के वीसी प्रभु नारायण सिंह के बयान तक दर्ज नहीं किये जा सके है।

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वहीं मृतक आईएएस के परिजनों के आरोपों के ध्यान में रखते हुए कर्नाटक सरकार को पत्र लिखकर अनुराग से संबंधित कई जानकारियां हासिल की है उधर मृतक के भाई ने बेंगलुरु जाने वाली टिकट कैंसिल कराने को लेकर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। वहीं पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट भाई ने सोमवार को अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में हत्या की एफआईआर दर्ज करने की बात कही है। आईएएस अनुराग की ेामैत की जानकारी मिलने पर पहुंचे परिजनों ने साजिश के तहत की गयी हत्या बताया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत दम घुटने की वजह से बताई गयी थी। जबकि मृतक अनुराग के पेट में अधपचा खाना पाया गया था इसका मतलब उनकी मौत देररात ही हो चुकी थी इसके अलावा यह भी था कि उनके हांठ के नीचे व शरीर के कई हिस्सों पर जख्म के निशान पाये गये थे जबकि पुलिस ने मॉनिंग वॉक के वक्त मौत का शक जताया था। परिजनों का कहना है अनुराग कई घोटालों की जांच कर रहे थे जिसके चलते उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित समय पर शंका मृतक के भाई मयंक के अनुसार पोस्टमार्टम को लेकर भी शंका बनी है 16 मई की शाम 4.55 बजे पोस्टमार्टम शुरू हुआ और 5.30 बजे खत्म हो गया इसका उल्लेख पोस्टमार्टम रिपोर्ट में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम शुरू ही 5.30 बजे हुआ था तो क्या रिपोर्ट में 35 मिनट पीछे का समय क्यों डाला गया?

मृतक के भाई मयंक के अनुसार कुछ दिनों पहले अनुराग ने उसे बताया थ कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी सरकारी रुपये को लूट रही है। उन्होंने इस महिला के करोड़ों रुपये के घोटाले में लिप्त होने की बात कही थी। मयंक के इस सवाल से प्रश्न उठ खडा हो रहा है कि आखिर वह महिला कौन है और उसका अनुराग की मौत से क्या संबंध है?

टिकट को किसने कैंसिल कराया-

मृतक आईएएस अनुराग के भाई मयंक के मुताबिक मृतक का 16 मई को जन्मदिन था तो परिवारीजनों ने उनसे रुकने को कहा था लेकिन वे काम अधिक होने को हवाला देते हुए वापस लौट गये थे उन्हें 16 मई की सुबह ही बेंगलुरु जाना था। इसके लिए उन्होंने जेट एयरवेज की फ्लाइट से टिकट बुक कराया था मयंक के मुताबिक जब उन्होंने अनुराग के मोबाइल का मैसेज बॉक्स चेक किया तो उसमें रात एक बजे टिकट कैंसिल होने को मैसेज पड़ा था। उन्होंने कहा कि जब अनुराग काम की वजह से घर पर नहीं रुके तो आखिर उनका टिकट किसने कैंसिल कराया?

स्पेशल टीम ने मामले की जांच कर रहे प्रभारी क्षेत्राधिकारी हजरतगंज ने परिजनों के आरोपों के मद्देनजर कार्नटक सरकार को पत्र लिखकर भेजा गया है। इस पत्र में पूछा गया है कि अनुराग तिवारी इन दिनों किन-किन घोटालों की जांच कर रहे थे। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गयी है कि क्या उन्होंने कभी किसी से धमकी मिलने की शिकायत की थी? उनके द्वारा ली गयी छुट्टियों का ब्योरा भी मांगा है। कर्नाटक सरकार से जवाब मिलने पर स्थिति साफ हो सकेगी।

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