शराब पीने से पैंक्रियाज खराब होने का खतरा अधिक 

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संवाददाता, लखनऊ  – शराब पीने से पैंक्रियाज छोटा होता जाता है। इस वजह से पैंक्रियाटिक डक्ट में स्टोन भी होने लगता है। फिर पैंक्रियाज से निकलने वाला जूस आंत में नहीं जा पाता है, जिससे पाचन की समस्या बढ़ जाती है। इससे पेट में लगातार दर्द की समस्या रहती है। इस दर्द से आगे की ओर झुकने पर आराम मिलता है। इसके साथ ही कुपोषण से भी बार-बार संक्रमण होता है, जिसका सीधा असर पैंक्रियाज पर पड़ता है। यह जानकारी पीजीआई के गेस्ट्रो सर्जन डॉ. आनंद प्रकाश ने शुक्रवार को दी।

कुपोषण की वह से भी पैंक्रियाज में हो जाती है दिक्कत

पीजीआई में शुक्रवार से तीन दिवसीय 21वां सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी वीक शिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इस दौरान डॉ. आनंद प्रकाश ने देश के विभिन्न राज्यों से आये युवा डॉक्टरों को जानकारी दी। इस मौके पर गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राजन सक्सेना, डॉ. रजनीश कुमार सिंह, डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, डॉ. वीके कपूर, डॉ. पीयूष साहनी, डॉ. एसएस सिकोरा, डॉ. आर. प्रदीप, डॉ. आरए शास्त्री, डॉ. टीके चटोपाध्याय, डॉ. एसएम चंद्रमोहन, डॉ. एच. रमेश, डॉ. पुनीत धर, डॉ. टीडी यादव समेत अन्य प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में दोबारा सर्जरी की जरूरत

पीजीआइ के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. आनंद प्रकाश ने बताया कि एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने पर पैंक्रियाटाइटिस डक्ट को छोटी आंत के खराब हिस्से से हटाकर आगे जोड़ देते हैं। इससे एमाइलेज और लाइपेट छोटी आंत में चला जाता है, जिस जगह छोटी आंत में जोड़ते हैं। वहां पर लीकेज होने पर आंत के आसपास यह जूस इक_ïा हो जाता है, जिससे सिस्ट बन जाता है। इससे पेट में सूजन और एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस हो जाता है। इससे पैंक्रियाज सिकुड़ जाता है।  पैंक्रियाटाइटिस डक्ट में रूकावट हो जाती है। डक्ट में स्टोन बनने लगता है। पैंक्रियाज से निकलने वाला एनाइलेज और लाइपेज आंत में नहीं जा पाता है।

दोबारा सर्जरी की जरूरत

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री ऑपरेटिव सर्जरी थीम पर जानकारी देते हुये पीजीआई के गेस्ट्रो सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि खाने की नली और अमाशय (पाचन तंत्र का ऊपरी) एसिड पीने की कारण नष्ट हो जाता है। आंत के टुकड़े से नया खाने का रास्ता बनाया जाता है। इस सर्जरी के पांच से 10 फीसदी मामलों में दोबारा सर्जरी करनी पड़ती है। नयी बनायी गई खाने की नली में सिकुडऩ, नली जोड़ की जगह पर लीकेज, इसोफेजियल फेस्चुला के कारण दोबारा सर्जरी की नौबत आ जाती है। दोबारा सर्जरी में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है, जिससे तीसरी बार सर्जरी की नौबत न आये। सर्जरी के बाद पूरी बनावट बदल जाती है। साथ ही सिकुडऩ से दूसरे अंगों से नली चिपक जाती है। ऐसे में काफी सावधानी की जरूरत होती है।

पीजीआई के गेस्ट्रो सर्जन डॉ. अशोक कुमार  ने बताया कि आंत से बनायी गयी नई खाने के नली में सिकुडऩ की परेशानी होने पर पेट रोग विशेषज्ञ बैलूनिंग कर सिकुडऩ को दूर करने का प्रयास करते हैं। इसमें सफलता न मिलने पर दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कई बार पोषण की कमी, स्टेरायड दवा खाते रहने,
एलब्यूमिन कम होने पर नई नली जहां से जोड़ी जाती है, वहां से वह खुल जाती है। इससे भोजन लीक होने लगता है। ऐसे में दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ती है। भोजन निगलने में परेशानी, उल्टी, गले में जलन की परेशानी सर्जरी के बाद हो तो तुरंत सलाह लेनी चाहिये।

आत्महत्या के लिये पीते हैं एसिड

जिंदगी से तंग होकर उसे समाप्त करने के लिये अधिकतर लोग एसिड पी लेते हैं, लेकिन उनकी मौत नहीं हो पाती। वह जीवन लीला समाप्त करने के लिये एसिड पीने के बाद के खतरे को नहीं जानते हैं। एक बार एसिड पीने से भोजन की नली और कई बार अमाशय भी जल जाता है। कई लोग अनजाने में भी एसिड पी लेते है। पीजीआई में अब तक 50 से अधिक लोगों में एसिड बर्न इंजरी की सर्जरी की जा चुकी है।

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