लखनऊ । 10 जनवरी यानी शुक्रवार को होने वाले चंद ग्रहण को लेकर पंचांगों में मतभेद देखने को मिल रहा है। कुछ पंचांगों में ग्रहण का उल्लेख मिलता है, जबकि ज्यादातर पंचांगों में ग्रहण का जिक्र ही नहीं है। वैसे ज्यादातर ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण के सूतक या उसका कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा। कुछ विशेषज्ञ पंडितों का कहना है कि सुप्रसिद्ध महावीर, ठाकुर प्रसाद आैर विश्व पंचांग में ग्रहण का जिक्र नहीं किया गया है, जबकि पत्रा पंडित राम प्रसाद जी सिद्धांती में ग्रहण का असर आैर प्रभाव होने का वर्णन किया गया है। जब कि अन्य पंडितों का कहना है कि 10 जनवरी को पूर्णिमा को उपछाया चंद्र ग्रहण लगेगा। उपछाया ग्रहण होने से इस ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा। ग्रहण काल में पूजा-पाठ आदि कर्म किए जा सकेंगे, इसमें चंद्रमा घटता-बढ़ता नहीं दिखायी देगा, सिर्फ चंद्र के आगे धूल की एक परत-सी छा जाएगी। इस कारण चंद्र ग्रहण का कोई असर नहीं होगा।
ग्रहण मिथुन राशि के पुनर्वसु नक्षत्र में होगा। ग्रहण रात में 10.39 बजे से शुरू होगा। इसका मध्य 12.39 बजे होगा, इसका मोक्ष रात 2.40 बजे पर होगा। ये ग्रहण करीब 4 घंटे 50 मिनट का रहेगा। एशिया के कुछ देशों, यूएस आदि में ये ग्रहण देखा जा सकेगा। यह केवल उपच्छाया ग्रहण है। चंद्र पृथ्वी और सूर्य तीनों ग्रह एक सीधी लाइन में नहीं होते है। पृथ्वी की हल्की सी छाया चंद्र पर पड़ती है। उन्होंने बताया कि साल 2020 में 4 उपछाया चंद्र ग्रहण होंगे। उपछाया चंद्र ग्रहण होने से इस ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा। जनवरी, जून एवं नवंबर का चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, वहीं 5 जुलाई को भारत में दिखाई नहीं देगा। नए साल में पहला सूर्यग्रहण 21 जून को लगेगा भारत में दिखेगा।। दूसरा सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को लगेगा, लेकिन यह भारत में नहीं दिखेगा।
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