टीवी उन्मूलन में निजी क्षेत्र की भूमिका अहम

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लखनऊ – राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने निजी क्षेत्र के चिकित्सकों के लिए वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया | कार्यक्रम का उदघाटन एरा मेडिकल कालेज के पल्मोनरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया | डा. राजेंद्र प्रसाद ने कहा- क्षय रोग उन्मूलन सरकार के मुख्य उद्देश्यों में सबसे ऊपर है, जिसमें सार्वजानिक क्षेत्र के साथ निज क्षेत्रों है | निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को टीबी रोगी की सूचना समय से स्वास्थ्य विभाग को मुहैया कराना चाहिए |
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ ) डा. संजय भटनागर ने कहा वर्तमान में टीबी की जाँच के लिए जिले में अत्याधुनिक पांच ट्रूनेट तथा चार सीबीनाट मशीनें हैं | इसके द्वारा टीबी की जाँच की जाती है | टीबी के मरीजों को नोटिफाई कर उन्हें इलाज मुहैया कराना है तथा उन्हें निक्षय पोषण योजना से जोड़ना है |
इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉं ए.के.चौधरी ने बताया – जिले में वर्तमान में निजी क्षेत्र में टीबी के 6470 रोगी नोटिफाई हैं | उन्होंने बताया- सभी क्षय रोगियों का ड्रग अतिसंवेदनशीलता परीक्षण (यूनिवर्सल ड्रग ससेप्टीबिलिटी टेस्ट ) इलाज शुरू करने के 15 दिन के भीतर कराने पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है | इस टेस्ट से यह पता लगाया जाता है कि कौन सी टीबी की दवा व्यक्ति के लिए संवेदनशील है , जिससे मरीज को सही उपचार दिया जा सके।
डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के टीबी एवं श्वसन रोग विभाग के प्रोफेसर हेमंत कुमार ने बताया- टीबी रोगियों की जांच व निदान के लिए कार्यक्रम में आधुनिकतम जांच प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पूरी तरीके से निःशुल्क उपलब्ध है तथा गुणवत्ता की दवाइयां भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं |
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) की डॉ अपर्णा सेन चौधरी द्वारा निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को डायग्नोसिस तथा टीबी के मरीजों की यूडीएसटी भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप कराने के लिए प्रेरित किया गया
इस मौके पर एनटीईपी के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) अभय चंद्र मित्रा, जिला कार्यक्रम समन्वयक दिलशाद हुसैन, डीपीपीएमसी राम जी वर्मा, फहीम अहमद एनटीपी के कर्मचारी, टीबी के क्षेत्र में काम करने वाली “जीत प्रोजेक्ट” के प्रतिनधि इमरान, अंजुला सचान, शैलेंद्र तथा 100 से ज्यादा निजी क्षेत्र के चिकित्सकों द्वारा प्रतिभाग किया गया ।

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