रैगिंग प्रकरण में हो सकती है सीनियर मेडिकोज पर कार्रवाई

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रैगिंग के मामले में जांच शुरू होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में अभी तक कोई पकड़ में नहीं आने से हड़कम्प मचा हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने को बचाने के लिए यह भी तय किया गया है कि रैगिंग के मामले में अगर कोई दोषी नहीं मिलता है, तो एमबीबीएस सेकेंड ईयर के सभी मेडिकोज पर जुर्माना लगाकर वार्निंग भी दी जाएगी।

बताते चले कि केजीएमयू में प्रथम वर्ष के मेडिकोज की रैगिंग प्रकरण को खुद चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएस कुशवाहा देख रहे हैं। इसमें उस ड¬ूटी पर तैनात सुरक्षा गार्डों, मेडिकोज से पूछताछ की जा रही है। साथ ही हॉस्टल से क्लासरूम तक जाने और आने के बीच स्टूडेंट्स की गतिविधियों को सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के माध्यम वहीं सीनियर्स भी इस जांच के दायरे में आ गये हैं। प्रो. कुशवाहा की माने तो अभी तक किसी ने भी रैगिंग की बात नहीं कबूली है, लेकिन जो विडियो हमारे सामने आया है उसमें रैगिंग साफ तौर पर देखी जा रही है। ऐसे में सीनियर्स मेडिकोज पर जुर्माना और वार्निंग की कार्रवाई कर कि या जा सकता है।

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केजीएमयू प्रशासन ने रैगिंग के खिलाफ स्टूडेंट्स के परिजनों से प्रमाण पत्र साइन करवाए हैं। साथ ही जूनियर स्टूडेंट्स के परिवारीजनों से भी पूछताछ की जा सकती है। जिससे कि रैगिंग के मामले में और इनपुट निकाले जा सकें। जांच अधिकारियों का यह मानना है कि स्टूडेंट्स अपने पैरेंट्स से इस मामले में हो सकता है कि कुछ चर्चा किये हों। उनके व्यवहार परिवर्तन के बारे में जानकारी ली जा रही है। पिछले वर्ष रैगिंग की शिकायत अधिकारियों से परिजनों ने ही की थी। जिसके बाद कार्रवाई हुई थी।

कॉल डिटेल भी देखी जा सकती है
रैगिंग की घटना बड़ी न होने पाए इसको देखते हुए हर तरह से जांच की जा रही है। स्टूडेंट्स की कॉल डिटेल भी देखी जा सकती है। जिससे कि पता चल सके कि देर रात किसी सीनियर ने फोन तो नहीं किया है।

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