प्रमुख अस्पतालों में दवाओं का संकट

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लखनऊ। प्रमुख सरकारी अस्पतालों में भले ही पर्याप्त दवाओं के दावे किये जाते हैं लेकिन बलरामपुर आैर लोहिया अस्पताल में मरीज दवाओं के लिए भटकते दिखायी दिये। डाक्टर की लिखी दवा की पर्ची लिए तमाम मरीज एक से दूसरे दवा काउंटर पर चक्कर लगाकर हार गए। कारण बताये जाते हैं कि आर्डर के अनुरूप दवा कम्पनियां सप्लाई नहीं कर रहीं हैं। उनको कई बार रिमांडर भेजे गए लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

बलरामपुर व लोहिया अस्पताल का हाल –

बलरामपुर अस्पताल में दवाओं की कमी का साफ असर देखा जा सकता है। हाल ही में लोकार्पित हुए ओपीडी काम्पलेक्स में सभी विभागों की ओपीडी, पांच दवा काउंटर स्थानांतरित किये गये, लेकिन दवाओं की कमी के चलते मरीजों को डाक्टर की लिखी पर्ची पर एक चिह्नित वरिष्ठ डाक्टर से साइन करवाने के बाद मुख्य आैषधि भण्डार जाना पड़ता है। सोमवार को कई मरीज इस व्यवस्था से काफी नाराज थे। गोलागंज से आए मोह्मद उमर को काउंटर नम्बर दो पर दवा नहीं मिली आैर मुख्य आैषधि भण्डार जाने को कहा तो उनका धैर्य जवाब दे गया। चिल्लाकर बोले एक तो डायबिटीज आैर बीपी का मरीज हूं, उस पर दवा के लिए इतनी दौड़-धूप कराना ठीक नहीं है।

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दवाओं की कमी को अस्पताल के निदेशक डा. ईयू सिद्दीकी साफ नकार देते हैं कि यदि मुख्य आैषधि भण्डार में दवा नहीं होती है तो लोकल परचेज से मंगवाते हैं। यही बात मुख्य आैषधि भण्डार से कुछ खास दवाओं का वितरण होता है, इससे मानीटरिंग में सहूलियत होती है। दूसरी तरफ गोमतीनगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में भी कई मरीज दवाओं के लिए इधर से उधर चक्कर काटते दिखे। वहीं अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोरों पर ऐसी मरीजों की संख्या दर्जनों में दिखी तो जिनके हाथ में अस्पताल की दवा पर्ची थी।

इन मरीजों का कहना था कि इलाज करवाना मजबूरी है। सूत्र बताते हैं कि दवाओं की कमी हाल यह है कि दस दिन पहले पैरासीटामाल दवा की कमी हुई तो दूसरे अस्पताल से उधर मगवाई गयी। इससे पहले एण्टी रैबीज वैक्सीन खत्म हुई तो कई दिनों तक वैक्सीनेशन भी बंद रहा। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. ओमकार यादव भी दवाओं की कमी से नकार करते हैं। उनका कहना है कि यदि किसी मरीज को दवा नहीं मिलती है, तो उनसे शिकायत कर सकता है।

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